Career in Cyber Security ?

साइबर सिक्यूरिटी क्या है ?

जैसा की नाम से ही हम समझ सकते है कि साइबर की सिक्यूरिटी करना ही साइबर सिक्यूरिटी कहलाता है I साइबर सिक्यूरिटी जानने से पहले हम जानेंगे की साइबर सिक्यूरिटी का मतलब क्या है I साइबर सिक्यूरिटी दो शब्दों से मिल कर बना है, साइबर और सिक्यूरिटी I

साइबर का मतलब है इन्टरनेट में जो कुछ भी उपलब्ध है चाहे वो तस्वीर हो, लेख हो, विडियो हो, ये सभी साइबर के अन्दर आते है I आज हम अपनी बहुत सी जानकारी सोशल मीडिया में शेयर करते है और बहुत सी हमारी ऐसी जानकारी होती है जिसे हम सभी के शेयर नही कर सकते है , वो बहुत ही खास होती है या यूँ कहे वो जानकारी हमारे लिए बहुत ही कीमती होती है I

हम हमेशा सचेत रहते है कि कही कोई इन जानकारी को चुरा न ले I ताकि हमें किसी तरह का नुकसान न हो I इसीलिए हमें हमेशा इसकी सिक्यूरिटी की चिंता रहती है I और इसमें हमारी मदद करती है साइबर सिक्यूरिटी I

साइबर सिक्यूरिटी एक तरह की तकनीक है जो इन्टरनेट की दुनिया में हमारी मदद करती है ताकि कोई हमारी जानकारी को चुरा कर उसका गलत इस्तेमाल न करे I

तो आइये आज हम जानते है कि साइबर सिक्यूरिटी के बारे में जानकर कैसे हम अपनी जानकारियों को गलत हाथों में जाने से रोक सकते है I और अगर आप यहाँ पर अपना कैरियर बनाना चाहते है तो इसमें बहुत सी संभावनाए है जिससे आप अपना एक सुन्दर भविष्य बना सकते है और अची कमाई कर सकते है I

साइबर सिक्यूरिटी में अपना करियर कैसे बनाये ?

अपने डाटा को सुरक्षित रखना आज अमूमन हर कंपनी की जरूरत है। यही वजह है कि आज साइबर सिक्योरिटी एक्सपर्ट्स की मांग काफी बढ़ गई है। साइंस ही नहीं, बल्कि आर्ट्स और कॉमर्स बैकग्राउंड वाले छात्रों के लिए भी इस क्षेत्र में कई तरह के कोर्सेज हैं।

कंप्यूटर, इंटरनेट और नेटवर्क पर हमारी बढ़ती निर्भरता ने एक बहुत बड़े रोजगार क्षेत्र को जन्म दिया है जिसका नाम है साइबर सिक्योरिटी। आज बिजनेस, साइंटिफिक रिसर्च, शिक्षा आदि क्षेत्रों से संबंध रखने वाली तमाम तरह की कंपनियां व संस्थाएं, चाहे वह प्राइवेट हों या सरकारी, अपनी गोपनीय सूचनाएं व डाटा को कंप्यूटर में ही स्टोर करके रखती हैं। ऐसे में इन कंपनियों में ऐसे लोगों की भारी मांग है, जिन्हें सॉफ्टवेयर, सर्वर, नेटवर्क और प्रोटोकॉल की गहरी समझ हो और जो इंफॉर्मेशन सिक्योरिटी व एथिकल हैकिंग के बारे में जानते हों।

इस क्षेत्र को भविष्य में प्रोफेशन बनाने के लिए 12वीं के बाद कंप्यूटर इंजीनियरिंग/ कंप्यूटर साइंस/ आईटी में बीटेक/बीई कर सकते हैं। इनमें दाखिले के लिए 12वीं पीसीएम से पास होना जरूरी है। इसके बाद कंप्यूटर साइंस/कंप्यूटर इंजीनियरिंग/नेटवर्क इंजीनियरिंग/ आईटी/ सायबर सिक्योरिटी/ इंफॉर्मेशन सिक्योरिटी या कंप्यूटर फॉरेंसिक में एमटेक का भी विकल्प है। कोर्स के बाद सिक्योरिटी एनालिस्ट या एथिकल हैकर के तौर पर काम की शुरुआत कर सकते हैं। इसके बाद सिक्योरिटी कंसल्सटेंट, सिक्योरिटी ऑडिटर आदि अवसर भी हैं। आर्ट्स व कॉमर्स के छात्र भी बना सकते हैं राह ।

हालांकि इस फील्ड में साइंस से 12वीं कक्षा पास करने वाले छात्रों के लिए कोर्सेज व अवसरों की ज्यादा संभावना है, लेकिन आर्ट्स या कॉमर्स से 12वीं पास व ग्रेजुएट छात्रों के लिए देश के कई संस्थानों में इस क्षेत्र से संबंधित कोर्स हैं।

साइबर सिक्यूरिटी की भविष्य में संभावनाए

टेक्नोलॉजी के बढ़ने से आज लगभग हर फिल्ड में कंप्यूटर और इंटरनेट का इस्तेमाल किया जा रहा है. आज ऐसा समय आ गया है कि इंटरनेट और कंप्यूटर पर हमारी लगातार निर्भरता बढ़ती जा रही है। हालांकि जैसे-जैसे हमारी जिंदगी में इंटरनेट की दखल बढ़ती जा रही है वैसे-वैसे ही साइबर क्राइम की रफ्तार भी बढ़ रही है। जिस वजह से इस फिल्ड में साइबर सिक्योरिटी और साइबर लॉ जानने वाले पेशेवरों की मांग बढ़ गई है।

जैसे-जैसे लोगों की कंप्यूटर और इंटरनेट पर निर्भरता बढ़ती जा रही है वैसे-वैसे साइबर क्राइम भी बढ़ते जा रहे है। साइबर क्राइम के बढ़ने से इस क्षेत्र में ऐसे विशेषज्ञों की मांग बढ़ गई है जो साइबर सिक्योरिटी एक्सपर्ट है और जिन्हें साइबर लॉ की नॉलेज है। आपको बता दें कि कानून और पुलिस साइबर अपराधों को रोक पाने में नाकाम रही है जिस वजह से इस फिल्ड में एक्सपर्ट के लिए बहुत संभानाएं उत्पन्न हुई है। इस फिल्ड में उन लोगों की खासी डिमांड बढ़ गई है जो लोग साइबर की हाइटेक टेक्नोलॉजी से वाकिफ होते है।

करियर ऑप्शंस-

अगर आप साइबर लॉ से जुड़ा कोई कोर्स करना चाहते है तो इस फिल्ड में करियर ऑप्शंस की कमी नही है। आप इन क्षेत्रों में अपना करियर बना सकते है-

रिसर्च- अगर आप चाहते है कि इस फिल्ड में जाकर रिसर्च करें तो आप देश की कई यूनिवर्सिटी में जाकर एक रिसर्चर के रूप में काम कर सकते है। इसके अलावा लॉ-फर्म्स, मल्टीनेशनल कंपनियां, गवर्नमेंट डिपार्टमेंट आदि में काम कर सकते है। इसके अलावा आप चाहे तो किसी विदेशी यूनिवर्सिटी में जाकर भी रिसर्चर के रूप में काम कर सकते है यहां पर आपको स्कॉलरशिप भी मिल सकती है।

ट्रेनिंग के क्षेत्र में-

साइबर सिक्योरिटी में आपको ट्रेनर के तौर पर भी अच्छी जॉब मिल सकती है इनमें बड़ी कंपनियां, पुलिस डिपार्टमेंट, सरकारी संस्थाएं, कॉर्पोरेट हाउस आदि आते है जिनमें आपको एक ट्रेनर के रूप में काम मिल सकता है। इसके अलावा आप चाहे किसी इंस्टीट्यूट में फैकल्टी मेंबर के तौर पर भी काम कर सकते है।

लॉ के क्षेत्र में- आप साइबर लॉ से जुड़े विशेषज्ञ वकील बनकर भी इस फिल्ड में अच्छा करियर बना सकते है।


साइबर सिक्यूरिटी की पढाई कहा से करे ?

यहां से कर सकते है कोर्स-

-सिम्बायोसिस सोसायटी लॉ कॉलेज, पुणे

-आसियान स्कूल ऑफ साइबर लॉ, पुणे

-सेंटर ऑफ डिस्टेंस एजुकेशन, हैदराबाद

-इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी, इलाहाबाद

-साइबर लॉ कॉलेज, नावी

-अमेटी लॉ स्कूल, दिल्ली
-डिपार्टमेंट ऑफ लॉ, दिल्ली यूनिवर्सिटी

कितना कमा सकते है ?

शुरुआती पैकेज 20 से 25 हजार महीना करियर की शुरुआत में 20 से 25 हजार महीना दिया जाएगा. वहीं अगर आपके पास अच्छा अनुभव हो तो सालाना पैकेज 5 से 7 लाख हो सकता है.

How to Become a Commercial Pilot ?

पायलट बनने की योग्यता , कोर्स, कोर्स की अवधि और पायलट बनने में खर्च होने वाली राशि :

हर बच्चे का सपना होता है कि काश वो  असमान में उड़ सके I ये सपने पूरा करने के दो तरीके है या तो हवाई जहाज का टिकेट खरीद कर उसमे सवारी की जाये या फिर खुद से प्लेन उड़ाया जाए I जो लोग चाहते है की प्लेन उडाये उन्हें पायलट बनना पड़ता है I पायलट बनने से न सिर्फ उड़ने का सपना पूरा होता है बल्कि आप उसे अपना प्रोफेशन बना कर अच्छी खासी सैलरी भी पा सकते है I आज हम इसी पे बात करेंगे कि पायलट कैसे बना जाये ?

इंडिया में पायलट दो तरह से बन सकते है I पहला सिविल एविएशन, जिसमे कमर्शियल पायलट बना जा सकता है और दूसरा तरीका होता है इंडियन डिफेन्स फोर्सेज , जिसमे पायलट बनने के लिए पहले एयर फ़ोर्स में भर्ती होना पड़ता है और वो पायलट भारतीय सेना के लिए काम करते है I आज हम कमर्शियल पायलट कैसे बने इस विषय में बात करेंगे I

कमर्शियल पायलट क्या होता है ?

कमर्शियल पायलट किसी एयरलाइन्स के लिए खास प्लेन उड़ाता है जिसके लिए उसे इंडियन अथॉरिटी से कमर्शियल पायलट सर्टिफिकेट मिलता है I उदाहरण के लिए एयर इंडिया , इंडिगो , जेट एयरवेज जैसे इंडियन एयरलाइन्स में जो पायलट चलाते है वो सब कमर्शियल पायलट होते है I एक कमर्शियल पायलट जब प्लेन में होता है तो उसमे सेकड़ो लोगों के जान की जिम्मेदारी होती है I उसका काम उन लोगों को एक जगह से दूसरी जगह तक तेजी से सुरछित पहुचाना होता है I

पायलट बनने के लिए कोण से सब्जेक्ट्स में पढाई करनी चाहिए ?

एविएशन को करियर बनाने के लिए आपको बारहवीं की परीक्छा साइंस स्ट्रीम से पास करनी होती है I ग्यारहवीं में फिजिक्स , मैथ और केमिस्ट्री लेना जरुरी है I पायलट ट्रेनिंग कोर्स में ऐडमिशन लेने के लिए आपको एक एंट्रेंस टेस्ट पास करना होता है जिसमे एक लिखित टेस्ट , मेडिकल एग्जामिनेशन और एक इंटरव्यू होता है I एक बात आपको ध्यान रखनी होगी कि पायलट बनने के लिए कोर्स में दाखिला लेने के लिए आपको बारहवीं में कम से कम 50% अंक होने जरुरी है I

भारत में कमर्शियल पायलट बनने के लिए आपको क्या क्या करनी होगी वो सारी जानकारी नीचे दी गयी है :

स्टेप 1 : फ्लाईंग स्कूल में ऐडमिशन लेकर बीएससी करे

पायलट कोर्स करने के लिए सबसे पहले आपको फ्लाइंग स्कूल में ऐडमिशन लेना होगा I जिसके लिए आपको रिटेन टेस्ट के साथ नीचे दिए गए चरण से गुजरना होगा I

  1. रिटेन टेस्ट : सबसे पहले आपका रिटेन टेस्ट होगा जिसमे मैथ , केमिस्ट्री और फिजिक्स से जुड़े सवालों के जवाब देने होंगे I टेस्ट में बारहवीं क्लास तक के रीजनिंग प्रश्न भी होंगे I
  2. पायलट एप्टीट्यूद टेस्ट : इस टेस्ट में आपके मौसम विज्ञानं, एयर नेविगेशन , हवाई जहाज से जुड़े सवाल आपसे पूछे जायेंगे I
  3. इंटरव्यू और मेडिकल : जो स्टूडेंट्स रिटेन टेस्ट में पास हो जायेंगे, उसके बाद उनके पर्सनल इंटरव्यू होगा और मेडिकल होगा जो भारत सिविल एविएशन के डायरेक्टरेट जनरल द्वारा लिया जायेगा I

स्टेप 2 : स्टूडेंट पायलट लाइसेंस प्राप्त करे

बीएससी करने के बाद आपको स्टूडेंट लाइसेंस लेना होता है जिसके लिए आपको एक एंट्रेंस एग्जामिनेशन देना होगा I जिसमे एक ओरल टेस्ट होगा जो स्कूल के मुख्य ट्रेनर या डायरेक्टरेट जनरल लेगा I स्टूडेंट लाइसेंस मिलने के बाद आपको ट्रेनिंग के लिए फ्लाइट उड़ाने की आज़ादी मिलेगी I इस दौरान आपको ग्लायडर या छोटे विमान उड़ाने की अनुमति मिलती है जो फ्लाइट क्लब द्वारा दिए जाते है जो भारत सरकार से प्रमाणित होते है I

पायलट कोर्स करते हुए आपको कम से कम 250 फ्लाइंग हौर्स पुरे किये होने चाहिये उसके बाद ही आप कमर्शियल पायलट लाइसेंस के लिए अप्लाई कर पाएंगे I

पायलट बनने में होने वाली खर्च और पायलट की सैलरी

बहुत से लोगों के मन में ये सवाल रहता है कि पायलट एजुकेशन कॉस्ट यानि पायलट बनने में कितना खर्चा आता है ? तो दोस्तों पायलट की पढाई पूरी करने में काफ़ी खर्चा आ जाता है I  अगर एक एस्टीमेट बताया तो कम से कम 15 से 20 लाख का टोटल खर्चा आता है I एक दूसरा सस्ता जरिया भी है जिसमे आप कम पैसे में पायलट बन सकते है इसके लिए आपको इंडियन डिफेन्स फोर्सेज ज्वाइन करना होगा I

अगर हम एक कमर्शियल पायलट के सैलरी की बात करे तो वो भी काफ़ी हाई होती है I एक नए बने पायलट की शुरुवाती वेतन 80 हजार से 1.5 लाख मासिक तक होती है जिसमे वो कमर्शियल एयरलाइन्स के लिए फ्लाइट उड़ाता है I जो बाद में चल कर 3 लाख से 5 लाख मासिक तक पहुच सकती है I        

Psychologist कैसे बने ?

Psychologist कैसे बने ?

क्या आपने कभी सोचा है कि मनुष्य सोचते कैसे है, या अलग-अलग परिस्थितियों में उनका व्यवहार कैसे बदलता है, क्यों लोगों को अजनबियों से बात करना बहुत मुश्किल लगता है, क्या “मतिभ्रम”, “विकार” या “अचेतन मन” जैसे शब्द आपको उत्तेजित करते है और क्या आप मनोविज्ञान को एक करियर के रूप में देख रहे है तो आप एक दम सही चीज़ पढ़ रहें है। आज के बदलते जीवन और बहुत सी महत्वकांछाओं की वजह से लोगों के जीवन में तनाव बढ़ता ही जा रहा है जिससे छुटकारा प्राप्त करने के लिए साइकोलॉजिस्ट की मदद ली जा रही है।

साइकोलॉजी में इलाज दवाइयों का सेवन किये बिना, सोच में बदलाव लाकर किया जाता है। आज हम आपको हमारी इस पोस्ट के माध्यम से साइकोलॉजी और साइकोलॉजिस्ट क्‍या है इस बारे में संपूर्ण जानकारी प्रदान करने जा रहे है। यदि आप जानना चाहते है Psychology का क्या मतलब होता है ? और Psychologist कैसे बनते है  ? तो बस अंत तक पढ़े इस लेख को ।

Psychology का क्या मतलब होता है ?

मनोविज्ञान को मन का विज्ञान कहा जाता है। मनोविज्ञान में चेतन और अचेतन घटनाओं के अध्ययन के साथ-साथ भावना और विचार भी शामिल होते है। इसमें मनुष्य का व्यवहार तथा जीवन के बारे में रोचक तथ्य आदि चीज़े शामिल होती है। मानव व्यवहार का आधुनिक विज्ञान सबसे पहले जर्मनी में शुरू हुआ था और इसके पश्चात यह विश्व युद्ध के दौरान संयुक्त राज्य तक पहुँच गया। भारत में मनोविज्ञान लगभग 70 साल पहले आया था और तब से ही हमारे भारतीय मनोवैज्ञानिकों ने मनोविज्ञान को एक अलग अनुशासन के रूप में पहचानने के लिए बहुत ही कड़ी मेहनत की है।

Psychologist क्या है ?

साइकोलॉजी के क्षेत्र में कार्य करने वाले शोधकर्ता या एक पेशेवर व्यवसायी को सायकोलॉजिस्ट कहा जाता है। सायकोलॉजिस्ट हमारे व्यक्तिगत व सामाजिक व्यवहार में मानसिक कार्यों की भूमिका को समझने का प्रयास करते है, और इसके अलावा वो ज्ञान से संबंधित कार्यों और व्यवहारों को समझने वाली शारीरिक और जैविक प्रक्रियाओं की भी खोज करते है।

लोकप्रिय Psychologists और उनके योगदान :

भारत में साइकोलॉजी के क्षेत्र में विकास का श्रेय नीचे दर्शाये गए इन सायकोलॉजिस्ट को जाता है:

गनमूडियन डेविड बोअज़ (31 मार्च 1908 – 8 जुलाई 1965)

गनमूडियन डेविड बोअज़ पहले भारतीय मनोवैज्ञानिक थे और इन्होंने 1935 में ऑक्सफ़ोर्ड विश्वविद्यालय से पीएचडी और स्कॉट क्रिश्चियन कॉलेज से स्नातक की उपाधि प्राप्त की। इनके द्वारा भारत में पहले मनोविज्ञान विभाग की स्थापना सन 1943 में मद्रास विश्वविद्यालय में नोबेल पुरस्कार विजेता सर सी वी रमन की सहायता से की गयी थी। बोअज़ 27 सितंबर 1943 को इस विभाग में शामिल हुए और 27 अक्टूबर 1943 को यहां के वरिष्ठ व्याख्याता बने थे। भारत को मनोविज्ञान के क्षेत्र में आगे बढ़ाने और एक प्रमुख योगदानकर्ता बनाने का श्रेय गनमूडियन डेविड बोअज़ को ही जाता है।

नरेन्द्र नाथ सेन गुप्ता (23 दिसंबर 1889 – 13 जून 1944)

नरेंद्र नाथ सेन गुप्ता हार्वर्ड विश्वविद्यालय से शिक्षित एक भारतीय मनोवैज्ञानिक, दार्शनिक, और प्रोफेसर थे। इन्हे भारतीय वैज्ञानिक गनमूडियन डेविड बोअज़ के साथ भारत में आधुनिक मनोविज्ञान के संस्थापक के रूप में पहचाना जाता है। इन्होंने सन 1923 में भारतीय विज्ञान कांग्रेस एसोसिएशन के मनोविज्ञान और शैक्षिक विज्ञान विभाग की स्थापना में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। सेन गुप्ता इंडियन साइकोलॉजिकल एसोसिएशन के संस्थापक और भारत में पहली आधिकारिक मनोविज्ञान पत्रिका “इंडियन जर्नल ऑफ साइकॉलॉजी” के संपादक और संस्थापक भी थे।

एच नारायण मूर्ति (1924-2011)

होसुर नारायण मूर्ति एक भारतीय मनोवैज्ञानिक, लेखक, दार्शनिक, संस्कृत के विद्वान और शिक्षक होने के साथ बैंगलोर में राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य और तंत्रिका विज्ञान संस्थान (NIMHANS) में क्लिनिकल मनोविज्ञान विभाग के प्रमुख थे। इन्हे भारत में क्लिनिकल न्यूरोसाइकोलॉजी और व्यवहार चिकित्सा की शुरुआत करने का श्रेय जाता है। इसके अलावा इन्होंने क्लिनिकल मनोविज्ञान द्वारा मानसिक विकारों को वर्गीकृत करने के लिए भी अपना योगदान दिया है। दर्शन और मनोविज्ञान में अपना श्रेय देने के लिए इन्हे सर्वश्रेष्ठ विद्वान के “भाभा मेमोरियल गोल्ड मेडल” द्वारा सम्मानित किया गया है।

आशिष नंदी (जन्म 1937)

आशिष नंदी एक भारतीय राजनीतिक और क्लिनिकल मनोवैज्ञानिक, सामाजिक सिद्धांतकार और आलोचक है। इन्होंने यूरोपीय उपनिवेशवाद, विकास, आधुनिकता, धर्मनिरपेक्षता, विज्ञान, प्रौद्योगिकी, परमाणुवाद और स्वप्नलोक की सैद्धांतिक समीक्षा प्रदान किए है। इसके अलावा इन्होंने भारत के वाणिज्यिक सिनेमा और हिंसा की मूल रूपरेखा की पेशकश की है। नंदी को 2007 में फुकुओका एशियाई संस्कृति पुरस्कार से सम्मानित किया जा चुका है तथा 2008 में “द कार्नेगी एंडोमेंट फॉर इंटरनेशनल पीस” द्वारा प्रकाशित फॉरेन पॉलिसी मैगज़ीन के शीर्ष 100 सार्वजनिक बुद्धिजीवियों की सूची में भी स्थान प्राप्त कर चुके है।

गिरीश्वर मिश्रा (जन्म 21 अप्रैल 1951)

गिरीश्वर मिश्रा एक बहुत ही प्रसिद्ध और सम्माननीय भारतीय सायकोलॉजिस्ट है। इन्होंने मनोविज्ञान और सामाजिक विकास के क्षेत्र में अपना बहुमूल्य योगदान दिया है। इसके अलावा इन्होंने एक आदर्श के रूप में और सामाजिक सरोकार के क्षेत्र में भी उल्लेखनीय कार्य किया है। गिरीश्वर मिश्रा जी की उपलब्धियों को देखते हुए इन्हे वर्ष 2009 के लिए सामाजिक विज्ञान के क्षेत्र में राष्ट्रीय पुरस्कार से सम्मानित किया जा चुका है।

विद्यालयीन स्तर पर

यदि आप एक स्कूली विद्यार्थी है और भविष्य में मनोवैज्ञानिक बनना चाहते है तो आप अपने स्कूल में कक्षा 12वी में किसी भी विषय का चयन कर सकते है। वैसे बहुत से स्कूलों में मनोविज्ञान को अपने पाठ्यक्रम में शामिल कर दिया गया है, और यदि आप साइकोलॉजिस्ट बनना चाहते है तो आप किसी भी स्ट्रीम के साथ मनोविज्ञान का अध्ययन कर इसका बेसिक नॉलेज ले सकते है। परन्तु विद्यालयीन स्तर पर यह विषय पढ़ना ज़रुरी नहीं है।

स्नातक (B.A. / B.Sc)

साइकॉलॉजी में करियर बनाने के लिए आप UGC द्वारा मान्यता प्राप्त किसी भी संस्थान से मनोविज्ञान में स्नातक की डिग्री प्राप्त कर सकते है। स्नातक स्तर पर आपको साइकॉलॉजी से संबंधित सभी विषयों जैसे- जनरल साइकॉलॉजी, क्लिनिकल साइकॉलॉजी, सोशल साइकॉलॉजी, डेवलपमेंटल साइकॉलॉजी, ऑर्गेनाइजेशनल बिहेवियर आदि का अध्ययन करवाया जाता है जो आपको किसी एक निश्चित विषय में रुचि लेने में मदद करता है। इसमें तीन वर्षों की पढ़ाई के दौरान सबसे ज्यादा थ्योरिटिकल विषय होते है तथा सामान्यतः साइकॉलॉजी में ग्रेजुएशन होने के बाद भी नौकरी के ज्यादा अवसर नहीं होते है।

Psychologist बनने के लिए ग्रेजुएशन डिग्री प्रदान करने वाले कुछ शीर्ष कॉलेज नीचे प्रदर्शित है:

  • दिल्ली विश्वविद्यालय (नई दिल्ली)
  • जामिया मिल्लिया इस्लामिया (नई दिल्ली)
  • अंबेडकर विश्वविद्यालय (नई दिल्ली)
  • पंजाब यूनिवर्सिटी (चंडीगढ़)
  • बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (वाराणसी)
  • अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय
  • फर्ग्यूसन कॉलेज (पुणे)
  • क्राइस्ट यूनिवर्सिटी (बैंगलोर)

स्नातकोत्तर (Post Graduation)

स्नातक स्तर की पढ़ाई पूरी कर लेने के बाद आप पोस्ट ग्रेजुएशन कर सकते है। स्नातकोत्तर कॉलेजों में प्रवेश, प्रवेश परीक्षा या स्नातक में आपके अंकों के माध्यम से होता है। यदि आपने साइकॉलॉजी में ग्रेजुएशन नहीं किया है, तो भी आप स्नातकोत्तर के लिए आवेदन कर सकते है। लेकिन प्रवेश केवल प्रवेश परीक्षा के माध्यम से ही होगा। पोस्ट ग्रेजुएशन स्तर पर, आप अपनी पसंद तथा विशेषज्ञता के अनुसार विषय को चुन सकते है।

यदि आप मनोविज्ञान में अपना करियर बनाना चाहते है, तो पोस्ट ग्रेजुएशन करना बहुत जरूरी है। पोस्ट ग्रेजुएशन करने के पश्चात् छात्रों को अपनी रुचि के मनोवैज्ञानिक क्षेत्र में मनोवैज्ञानिक शोध पत्र लिखने का अवसर मिलता है। इसके साथ ही छात्र लगभग 2-3 महीने तक की अपनी इंटर्नशिप पूरा करते है। इंटर्नशिप सायकोलॉजिस्ट के जीवन का एक बहुत ही महत्वपूर्ण समय होता है जहां आप विशेषज्ञ की देखरेख में काम करते है और सीखते है। जिससे आपको अपने कौशल और ज्ञान को बढ़ाने में मदद मिलती है।

Psychologist बनने के लिए पोस्ट ग्रेजुएशन डिग्री प्रदान करने वाले कुछ शीर्ष कॉलेज नीचे प्रदर्शित है:

  • दिल्ली विश्वविद्यालय
  • टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल साइंसेज (मुंबई)
  • अम्बेडकर विश्वविद्यालय (दिल्ली)
  • अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय (उत्तर प्रदेश)
  • जामिया मिलिया इस्लामिया विश्वविद्यालय (नई दिल्ली)
  • पंजाब विश्वविद्यालय (चंडीगढ़)
  • बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (उत्तर प्रदेश)
  • गौतम बुद्ध विश्वविद्यालय (उत्तर प्रदेश)

Psychologist के कार्य

साइकॉलॉजी की पढ़ाई पूर्ण करने के पश्चात् आप एक साइकोलॉजिस्ट के रूप में नीचे प्रदर्शित क्षेत्रों में करियर बना सकते है:

क्लिनिकल साइकॉलॉजी

क्लिनिकल साइकोलॉजिस्ट, मनोवैज्ञानिक समस्याओं वाले लोगों का उपचार करते है। ये उन लोगों के लिए एक चिकित्सक के रूप में कार्य करते है जो सामान्य मनोवैज्ञानिक संकट (जैसे, दुःख) का अनुभव कर रहे है या अन्य किसी पुराने मनोरोग से पीड़ित है। कुछ क्लिनिकल मनोवैज्ञानिक सामान्य चिकित्सक की तरह ही होते है।

परामर्श साइकॉलॉजी

काउंसलिंग साइकोलॉजिस्ट भी क्लिनिकल साइकोलॉजिस्ट की तरह ही कार्य करते है। परामर्श मनोवैज्ञानिक गंभीर मनोवैज्ञानिक विकारों से पीड़ित व्यक्तियों के बजाय कम समस्याओं वाले व्यक्तियों पर अधिक ध्यान केंद्रित करते है। परामर्श मनोवैज्ञानिकों को शैक्षणिक स्थल, कॉलेज परामर्श केंद्रों, सामुदायिक मानसिक स्वास्थ्य केंद्रों आदि में नियुक्त किया जाता है।

स्पोर्ट्स साइकॉलॉजी

खेल मनोवैज्ञानिक एथलेटिक प्रदर्शन में सुधार करने में सहायता करते है तथा ये मनोवैज्ञानिक स्वास्थ्य पर व्यायाम और शारीरिक गतिविधि के प्रभावों को भी देखते है। सामान्यतः खेल मनोवैज्ञानिक खेल टीमों के लिए सलाहकार के रूप में कार्य करते है।

एजुकेशनल साइकॉलॉजी

शैक्षिक मनोवैज्ञानिक शिक्षा के बुनियादी पहलुओं को सीखने और समझने की प्रक्रिया को बढ़ाने के लिए प्रयास करते है। शैक्षिक मनोवैज्ञानिकों को आमतौर पर शिक्षा के विभागों (मनोविज्ञान विभाग) में कॉलेजों और विश्वविद्यालयों के अंतर्गत नियुक्त किया जाता है।

उपरोक्त दर्शाये गए क्षेत्र सबसे ज्यादा प्रचलित क्षेत्र है इन क्षेत्रों के अलावा भी साइकॉलॉजी की पढ़ाई करने के बाद सामाजिक कार्य, एजेंसी या सामुदायिक परामर्श, औद्योगिक मनोविज्ञान आदि क्षेत्रों में करियर बनाया जा सकता है।

Psychologist के वेतन

मनोविज्ञान एक बहुत ही अत्यधिक पुरस्कृत और आकर्षक क्षेत्र है। एक मनोवैज्ञानिक का वेतन उनकी योग्यता, विशेषज्ञता के क्षेत्र और इस पेशे में अनुभव जैसे कई कारकों पर निर्भर करता है। M.Phil और Ph.D डिग्री वाले पेशेवर मनोवैज्ञानिक और निजी प्रैक्टिस में लगे लोगों के पास इस क्षेत्र में कमाई की संभावना ज्यादा होती है। इसमें शुरुआती वेतन 1.79 लाख रूपये से 6.23 लाख रूपये प्रति वर्ष के बीच अलग-अलग हो सकता है। कोई भी Psychologists Famous होकर अर्थात इस क्षेत्र में स्वयं को स्थापित और अपनी किसी भी शाखा में माहिर होकर अधिक से अधिक पैसे कमा सकता है।

Psychologist Vs Psychiatrist

साइकॉलॉजी और साइकायट्री दोनों मनुष्य के मन के व्यवहार से संबंधित है, परन्तु व्यवसायों के रूप में, ये दोनों एक-दूसरे से बहुत अलग है। ये दोनों अक्सर किसी मरीज़ की मदद करने के लिए एक साथ काम करते है और उनके नौकरी विवरण और कार्य करने के ढंग से ऐसा प्रतीत होता है जैसे वे एक ही कार्य करते है और दोनों एक ही है। इसलिए इन दोनों के बीच अंतर करने का सबसे आसान तरीका है कि मनोचिकित्सक प्रशिक्षित चिकित्सक होते है और उन्हें दवाओं को निर्धारित करने की अनुमति भी होती है। दूसरी ओर मनोवैज्ञानिक, मानसिक और भावनात्मक उथल-पुथल को समाप्त करने के लिए मनोचिकित्सा और जिस व्यवहार से मरीज़ से गुज़र रहा होता है उसमे हस्तक्षेप का उपयोग करते है।

Conclusion:

जैसा हमने आपको ऊपर बताया मनोविज्ञान वास्तव में एक बहुत ही नया विज्ञान है और इसमें पिछले 150 वर्षों में सबसे अधिक प्रगति हुई है । वैसे इसकी उत्पत्ति 400-500 ईसा पूर्व में प्राचीन ग्रीस में हो चुकी थी। आज मैंने आपको इस पोस्ट के माध्यम से Psychologist क्या होता है ?, Psychologist क्या करते है ? और Psychologist कैसे बने ?  इस बारे में विस्तार से जानकारी प्रदान की अगर आपको यह जानकारी पसंद आयी है तो इसे लाईक और शेयर करना न भूले ।

Fashion Designer कैसे बने ?

क्या आप फैशन डिज़ाइनर बनना चाहते हैं ? क्या आप Fashion Designing में Career बनाने का सपना देख रहे हैं ? तब तो आप बिल्कुल सही पोस्ट पढ़ रहे हैं। अगर आप Fashion Designer कैसे बने इसके बारे में पूरी जानकारी चाहते हैं, तो इस पोस्ट को सावधानी के साथ पढ़ें। इस पोस्ट में हम आपको Fashion Designing Career और Fashion Designer कैसे बने इससे रीलेटेड हर जानकारी बिस्तार से देंगे।

Fashion Designing Course नाम, दाम, शोहरत, और ग्लैमर से भरपूर होता है। अगर आप ग्लैमर की इस इंडस्ट्री में कैरियर बनाने की सोच रहे हैं। तो इसके लिए आपको Fashion Designing से जुड़े कोर्स करना चाहिए। इसके बाद आप Fashion Designing में इंटर्नशिप पूरी करें। इसके बाद आप Fashion Designer के तौर पर इस क्षेत्र में कैरियर बना सकते हैं।

आजकल बहुत सारे Fashion Designing के College में फैशन डिजाइनिंग के कोर्स संचालित किये जा रहे हैं। किसी भी Fashion Designing कॉलेज में एडमिशन लेने से पहले सही तरह से जांच- पड़ताल कर लें। इसके बाद ही एडमिशन लें। हमेशा याद रखें कि उसी कॉलेज में एडमिशन लें। जंहा पर प्रैक्टिकल की सारी सुविधाएं उपलब्ध हो। टीचिंग फैकलिटी वेल क्वालिफाइड हो और कैंपस प्लेसमेंट अच्छा हो। इन सब बातों की अच्छी तरह से जानकारी जुटाएं। इसके बाद ही एडमिसन लें।

आजकल बहुत से ऐसे Fashion डिजाइनिंग कॉलेज हैं। जोकी एडमिशन के समय आप से 100 % कैंपस प्लेसमेंट की बात करते हैं। लेकिन बाद में आपको निराशा ही हांथ लगती है। मैं आपको नीचे कुछ इंडिया के Best Fashion Designing college के बारे में बताऊंगा। जंहा से कोर्स करके निश्चित ही आप एक अच्छे Fashion Designer बन सकेंगे।

चलिये अब हम आपको बताते हैं कि फैशन डिजाइनिंग में कैरियर स्कोप क्या है। क्या Fashion Designing Course आपके लिए सही है या नही।

Career Scope as a Fashion Designer

आज के समय भारत मे बहुत तेजी के साथ Fashion Industry बढ़ रही है। आज का फैशन युग हर किसी को आकर्षित कर रहा है। इसी वजह से फैशन पसींदीदा ग्राहको की संख्या बढ़ रही है। पहले जमाने मे बहुत बड़े सेलिब्रिटी ही शादी समारोह में फैशन डिज़ाइनर के द्वारा डिज़ाइन की गई पोशाक पहनते थे। लेकिन वर्तमान समय मे ऐसा नही है। आज के दिनों में ऐसा नही है। अब तो बहुत से लोग शादी, समारोह के लिए स्पेशल Fashion Designer से परिधान डिज़ाइन कराते हैं। इसके अलावा फिल्म, टीवी शो, हॉलीवुड, बॉलीवुड में कलाकरों के लिए भी स्पेशल पोशाक डिज़ाइन कराई जाती हैं। सबसे खास बात ये है कि इन दिनों में युवाओं में फ़ैशन के प्रति ज्यादा दिलचस्पी बढ़ी है। नए- नए डिज़ाइन के कपड़े लोगों द्वारा पसन्द किये जा रहे हैं। मॉर्डन ज़माने में ग्राहको की पसन्द भी मॉर्डन है। इन सब वजहों से Fashion Industry में एक्सपर्ट लोगो की काफी बढ़ रही है।

एसोचैम की रिपोर्ट के अनुसार इंडिया में डिज़ाइनर कपड़ो का वर्तमान बाजार लगभग 162900 करोड़ का है। अम्बानी बिड़ला व टाटा, मित्तल जैसे बड़े बिजनेसमैन भी इस सेक्टर में आ गए हैं। वंही दूसरी ओर अमेजन, फ्लिपकार्ट, मयंत्रा, स्नैपडील, जैसी ई शॉपिंग कंपनियां Fashion Industry में कदम रख चुकी हैं। Fashion Market में इस ग्रोथ की वजह फैशन के प्रति लोगों का आकर्षण है।

इन दिनों में fashion शो भी बहुत लोकप्रिय हो गए है। इन Fashion Show में चर्चित Fashion Designer के अलावा नए फैशन डिज़ाइनर को भी अपने डिज़ाइन की गई ड्रेस पेश करने का मौका मिलता है।

इन सब बातों को देखते हुए, वर्तमान समय मे Fashion Designing में बहुत ही शानदार Career बनाया जा सकता है। Fashion डिजाइनिंग में बढ़ती लोकप्रियता के कारण इसमे कैरियर की बेहद संभावनाये नजर आ रही हैं। आज के समय मे fashion शो भी काफी होने लगे हैं। Fashion शोज की लोकप्रियता दिनो-दिन बढ़ रही है, जहां मनीष मल्होत्रा, रोहित बल, सत्य पॉल, रितु कुमार, रितु बेरी, सब्यसाची या तरुण तहिलियानी जैसे चर्चित फैशन डिजाइनरों के अलावा नए उभरते हए डिजाइनरों को भी अपने डिज़ाइन किये हुए परिधान पेश करने का मौका मिलता है। Fashion designer अपने इनोवेटिव गारमेंट्स के जरिए फैशन के नए-नए ट्रैंड्स बना देते हैं। इसके अलाव शादी ब्याह में भी डिज़ाइनर कपड़ो की काफी डिमांड होने लगी है।

Career Option in Fashion Designing

फैशन डिजाइनिंग कोर्स को करने के बाद अपनी रुचि के अनुसार एसेसरीज, लाइफ स्टाइल, कपड़ो के निर्माण और डिजाइनिंग के फील्ड में कैरियर बना सकते हैं। प्रोफेशनल Fashion Designer के रूप में एक्सपोर्ट हाउस, गारमेंट स्टोर चेन, टेक्सटाइल मिल, ज्वेलरी हाउस या बुटीक में फैशन डिज़ाइनर, पैटर्न मेकर, फैशन कॉर्डिनेटर, फैशन मर्चेंडाइजर, क्वालिटी कंट्रोलर, फैशन स्टाइलिस्ट, फैशन कोरियोग्राफर आदि के रूप में कैरियर बना सकते हैं।

Skills For Fashion Designer

फैशन डिजाइनिंग में कैरियर बनाने के लिए क्रिएटिविटी और डिजाइनिंग स्किल्स सबसे पहली आवश्यक योग्यता है। लगतार फैशन ट्रेंड से अपडेट रहना। डिजाइनिंग से रीलेटेड एक्सपेरिमेंट करते रहना। अन्य डिज़ाइनरस के डिज़ाइन को एनालाइज करना। मार्किट में फैशन की डिमांड की अच्छी समझ होना भी आवश्यक है। दुसरो से अलग हटकर आकर्षक डिज़ाइन करने की क्षमता। मार्किट रिसर्च करने की स्किल। हार्ड वर्किंग। ओवर कॉन्फिडेंस न रखे।

Fashion Designing Course in India

बीएससी इन फैशन डिजाइनिंग
एमएससी इन फैशन डिजाइनिंग
वीए इन फैशन डिजाइनिंग
एमए इन फैशन डिजाइनिंग
बैचलर इन फैशन टेक्नोलॉजी
डिप्लोमा इन फैशन डिजाइनिंग

Qualification For Fashion Design course

फैशन डिज़ाइन का कोर्स करने के लिए आप किसी भी स्ट्रीम से 12 वीं पास हों। अच्छे कॉलेज में एडमिशन प्रवेश परीक्षा के माध्यम से होता है। कुछ कॉलेज में डायरेक्ट 12वीं में प्राप्त अंको के आधार पर भी हो जाता है। निफ्ट और पर्ल इंस्टीट्यूट इंडिया के बेस्ट Fashion Designing कॉलेज हैं। इनमें एडमिसन के लिए आपको अच्छी तरह से प्रवेश परीक्षा की तैयारी करनी होगी।

Best Fashion Designing College in India

नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ फैशन टेक्नोलॉजी (निफ्ट), दिल्ली/ मुंबई/ बैंगलुरू

पर्ल एकेडमी, दिल्ली

सिम्बायोसिस इंस्टीट्यूट ऑफ डिजाइन, पुणे

नेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ डिजाइन, अहमदाबाद

नॉर्थरन इंडिया इंस्टीट्यूट ऑफ फैशन टेक्नोलॉजी

नेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ फैशन डिजाइनिंग, चंडीगढ़

स्कूल ऑफ फैशन टैक्नोलॉजी, पुणे

फ्रेंड्स अगर आपको इन कॉलेज में एडमिसन नही मिल पाता है। तो आप इनके अलावा अन्य कॉलेज से भी Fashion Designing कोर्स कर सकते हैं। हां ये कुछ ज्यादा ही अच्छे फैशन डिजाइनिंग कॉलेज हैं।

Fashion Designer Skills

फैशन डिजाइनिंग कोर्स करने के बाद किसी भी परिधान कंपनी में ऐसे प्रोफेशनल 15 से 20 हजार रुपये आसानी से मिल जाता है। अनुभव होने के बाद बढ़ जाता है। आप चाहें तो खुद का बुटिक या डेस्टिनेशन वेडिंग का काम भी शुरू करने की सोच सकते हैं।

Fashion Designing Course Fees

फैशन डिजाइनिंग कोर्स की फीस 50 से 90 हजार प्रतिबर्ष तक हो सकती है। वंही गवर्नमेंट कॉलेज में इस कोर्स की फीस काफी कम होती है।

Fashion Designer सैलेरी

शुरआत में एक Fashion Designer को 18 से 20 हजार रुपये प्रतिमाह मिल जाते हैं। वंही अच्छे फैशन डिज़ाइनर की शुरआती सैलेरी 25 से 30 हजार तक होती है। अनुभव होने के बाद सैलेरी भी बढ़ती रहती है।

फ्रेंड्स उम्मीद है कि Fashion Designer कैसे बने ? ये जानकारी आपको पसन्द आयी होगी। इस पोस्ट में मैंने Fashion Designing career से सम्बंधित हर जानकारी दी है। जोकि आपके लिए बहुत ही फायदेमंद होगी। अगर आपको हमारी ये इन्फॉर्मेशन पसन्द आयी है, तो कॉमेंट में yes करके हमे जरूर बताएं। धन्यवाद

Software Engineer कैसे बने ?

Software Engineer कैसे बने ?

वर्तमान समय में बच्चे से लेकर बड़े व्यक्तियों तक सभी बहुत एडवांस हो गए है और इसका सबसे बड़ा कारण नई-नई तकनीक  का आना है। आज हर कोई कंप्यूटर , लैपटॉप  के बारे में जानता है और उनको इस्तेमाल भी करता है। कंप्यूटर , लैपटॉप इस्तेमाल करते समय आपने उनमें कई  सॉफ्टवेयर  इस्तेमाल  किये होंगे। तो आपके दिमाग में कभी ना कभी ये सवाल ज़रूर आया होगा की यह  सॉफ्टवेयर  कौन बनाता है। इसी सवाल के जवाब के साथ आज हम आपके लिए सॉफ्टवेयर इंजीनियर के बारे में जानकारी लाये है।

सॉफ्टवेयर इंजीनियर वह होता है जो कंप्यूटर लैपटॉप आदि क्षेत्र में नई-नई तकनीक  बनाता है। जिसका इस्तेमाल करके हम अपने काम बड़ी आसानी से कर पाते है। एक Software Engineer बनना कोई आसान काम नहीं है इसके लिए आपको Software Engineer की पढाई  करनी होती है।

Software Engineering क्या है ?

Software Engineer को हम Software Developer भी कह सकते है। इसका मुख्य काम कंप्यूटर, लैपटॉप, मोबाइल  के लिए Apps और Program बनाना है। जब भी इन चीजों में कोई नई App या प्रोग्राम आता है तो उसे एक सॉफ्टवेयर इंजीनियर द्वारा ही बनाया जाता है और उसमे कोई समस्या आने पर सॉफ्टवेयर इंजीनियर ही उसे ठीक कर पता है, क्योंकि इनमें जिस लैंग्वेज का इस्तेमाल किया जाता है उन्हें हर कोई नहीं समझ सकता है।

Software Engineer बनने के लिए क्या करे ?

किसी भी फ़ील्ड में इंजीनियर बनने का सीधा सा मतलब है की आपको उस फ़ील्ड में काम करना पसंद है और बात करें सॉफ्टवेयर इंजीनियर की तो इसके लिए आपको कंप्यूटर, लैपटॉप, मोबाइल आदि तकनीक में रूचि होना चाहिए। यह कला आपको एक अच्छा सॉफ्टवेयर इंजीनियर बनने में मदद करेंगी। सॉफ्टवेयर इंजीनियर बनने के लिए आपको सामान्यता  Software Engineering Course करने होंगे।

यहाँ पर आपको प्रोग्राम या सॉफ्टवेयर बनाने में जिस लैंग्वेज का उपयोग होता है उन लैंग्वेज का अच्छा ज्ञान होना चाहिए, अन्यथा आप सॉफ्टवेयर इंजीनियर कभी नहीं बन पाएँगे। सॉफ्टवेयर इंजीनियरिंग के कोर्स में आपको वह सभी लैंग्वेज सिखाई जाती है जो नीचे हम आपको बता रहे है।

  • C Language
  • C++ Language
  • MATLAB
  • (.)Net
  • Java
  • SQL
  • Ruby
  • Python

एक सॉफ्टवेयर इंजीनियर बनने और Engineering में प्रवेश पाने के लिए आपको 12th Class में पास होना होगा, वह भी 50% अंक के साथ और उसमे Physics, Chemistry और Mathematics विषय भी शामिल होना चाहिए। उसके बाद आप किसी भी University में सॉफ्टवेयर इंजीनियरिंग कोर्स कर सकते है। हम आपको नीचे कुछ सॉफ्टवेयर इंजीनियर बनने के कोर्स और कुछ यूनिवर्सिटी के नाम बता रहे है।

 कोर्सेस :

  • B.Tech – Bachelor Of Technology (CS, IT)
  • B.C.A. – Bachelor Of Computer Application
  • B.Sc – Bachelor Of Science (CS)
  • Polytechnic Diploma (Computer Science)

विश्वविद्यालय :

  • देवी अहिल्या यूनिवर्सिटी, इंदौर
  • नेताजी सुभाष इंस्टिट्यूट ऑफ़ टेक्नोलॉजी, दिल्ली
  • मद्रास क्रिश्चियन कॉलेज, चेन्नई
  • द ऑक्सफोर्ड कॉलेज ऑफ साइंस, बैंगलोर
  • गुरु गोविंद सिंह इंद्रप्रस्थ यूनिवर्सिटी, दिल्ली
  • इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मुक्त विश्वविद्यालय
  • नालंदा ओपन यूनिवर्सिटी
  • लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी

इसके अलावा देश के सभी राज्यों में इंजीनियरिंग कॉलेज और IIT कॉलेज में प्रवेश के लिए कई Exam करवाई जाती है जैसे- JEE Main, JEE Advance, BitSet, AIEEE, VITEEE यह सभी National Level की परीक्षाये है। इन परीक्षाओं को पास करके आप एक अच्छे कॉलेज में प्रवेश प्राप्त कर सकते है जो हर साल आयोजित करवाई जाती है।

सॉफ्टवेयर इंजीनियर के कार्य

एक सॉफ्टवेयर इंजीनियर का मुख्य कार्य Programming करना, Software Development करना, Computer/Laptop के Software बनाना, Software Testing करना, Algorithm Design And Analysis करना, Mobile App बनाना आदि कार्य शामिल है। एक सॉफ्टवेयर इंजीनियर कई Apps, Programs बनाने से लेकर उनमें कोई समस्याएं आने पर उन्हें ठीक करने का भी कार्य करता है।

वेतन

एक सॉफ्टवेयर इंजीनियर की सैलरी सबसे ज़्यादा उसके अनुभव पर निर्भर करती है। जितना ज़्यादा अनुभव होगा उसकी सैलरी भी उतनी ही ज़्यादा होगी। शुरुवाती समय में एक सॉफ्टवेयर इंजीनियर को Fresher के रूप में 15,000 से लेकर 20,000 तक मिल सकते है और अनुभव के साथ-साथ उनकी सैलरी भी बढ़ती जाएगी।

Software Engineering के विषय

अगर आप Software Engineering करने जा रहे है तो आपको इसकी कुछ बेसिक चीजों का पता होना चाहिए जैसे- यह कोर्स 4 वर्ष का होता है और Software Engineer बनने वाले सभी विद्यार्थियों को पहले वर्ष में एक जैसे विषय ही पढ़ाये जाते है। इसका फायदा यह है इससे विद्यार्थियों को सभी बेसिक जानकारी प्रथम वर्ष में ही प्राप्त हो जाती है, जो सभी Courses में एक सामान होती है। तो आईये जानते है उन बेसिक विषयों के बारे में:

Software Engineer जॉब्स

एक सॉफ्टवेयर इंजीनियर के लिए Jobs की कोई कमी नहीं है बस उसके पास Talent होना चाहिए। एक अच्छी Job के लिए आपको कोर्स खत्म होने के बाद, अच्छी कंपनियों में Internship के लिए आवेदन करना चाहिए। उससे यह होगा की आपको सॉफ्टवेयर बनाने के तरीके पता चलेंगे और आपको सभी Language को समझना और Use करना आ जाएगा, मतलब आपको सॉफ्टवेयर बनाने का अनुभव हो जाएगा। बस अब आपको कंपनियों में Jobs के लिए Apply करना है आपके अनुभव के हिसाब से आपको आसानी से Job मिल जाएगी।

Conclusion:

दोस्तों भविष्य में अच्छी नौकरी के लिए हर कोई आज EngineerDoctor, आदि की पढ़ाई करते है, जिससे वह आगे जाकर एक अच्छी नौकरी प्राप्त कर सके और अपने भविष्य को Secure कर सके। इसी के चलते आज हमने आपको सॉफ्टवेयर इंजीनियर बनने की जानकारी प्रदान की, सॉफ्टवेयर इंजीनियर का काम और सॉफ्टवेयर इंजीनियर बनाना कोई आसान काम नहीं है।

इसके लिए आपको Engineering की पूरी पढ़ाई करना होती है और उसके साथ ही आपकी गणित और अंग्रेजी में भी अच्छी पकड़ होना चाहिए। Software Engineering के Bachelor कोर्स करने के बाद आप उसमे मास्टर डिग्री भी कर सकते है। तो अगर आपको यह महत्वपूर्ण जानकारी पसंद आयी हो तो सॉफ्टवेयर इंजीनियरिंग इन हिंदी की जानकारी अपने दोस्तों के साथ भी ज़रूर शेयर करें, धन्यवाद!

डिजिटल मार्केटिंग

डिजिटल मार्केटिंग क्या है ?

आज के युग में सब ऑनलाइन हो गया है। इंटरनेट ने हमारे जीवन को बेहतर बनाया है और हम इसके माध्यम से कई सुविधाओं का आनंद केवल फ़ोन या लैपटॉप के ज़रिये ले सकते है।

Online shopping, Ticket booking, Recharges, Bill payments, Online Transactions (ऑनलाइन शॉपिंग, टिकट बुकिंग, रिचार्ज, बिल पेमेंट, ऑनलाइन ट्रांसक्शन्स) आदि जैसे कई काम हम इंटरनेट के ज़रिये कर सकते है । इंटरनेट के प्रति Users के इस  रुझान की वजह से बिज़नेस Digital Marketing (डिजिटल मार्केटिंग) को अपना रहे है । यदि हम market stats की ओर नज़र डालें तो लगभग 80% shoppers किसी की product को खरीदने से पहले या service लेने से पहले online research करते है । ऐसे में किसी भी कंपनी या बिज़नेस के लिए डिजिटल मार्केटिंग महत्वपूर्ण हो जाती है।

डिजिटल मार्केटिंग का तात्पर्य क्या है ?

अपनी वस्तुएं और सेवाओं की डिजिटल साधनो से मार्केटिंग करने की प्रतिक्रिया को डिजिटल मार्केटिंग कहते है ।डिजिटल मार्केटिंग इंटरनेट के माध्यम से करते हैं । इंटरनेट, कंप्यूटर,  मोबाइल फ़ोन , लैपटॉप , website advertisements या किसी और applications द्वारा हम इससे जुड सकते हैं।

डिजिटल मार्केटिंग नये ग्राहकों तक पहुंचने का सरल माध्यम है। यह विपणन गतिविधियों को पूरा करता है। इसे ऑनलाइन मार्केटिंग भी कहा जा सकता है। कम समय में अधिक लोगों तक पहुंच कर विपणन करना डिजिटल मार्केटिंग है। यह प्रोध्योगीकि विकसित करने वाला विकासशील क्षेत्र है।

डिजिटल मार्केटिंग से उत्पादक अपने ग्राहक तक पहुंचने के साथ ही साथ उनकी गतिविधियों, उनकी आवश्यकताओं पर भी दृष्टी रख सकता है। ग्राहकों का रुझान किस तरफ है, ग्राहक क्या चाह रहा है, इन सभी पर विवेचना डिजिटल मार्केटिंग के द्वारा की जा सकती है। सरल भाषा में कहें तो डिजिटल मार्केटिंग डिजिटल तकनीक द्वारा ग्राहकों तक पहुंचने का एक माध्यम है।

डिजिटल मार्केटिंग क्यो आवश्यक है ?

यह आधुनिकता का दौर है और इस आधुनिक समय में हर वस्तु में आधुनिककरन हुआ है। इसी क्रम में इंटरनेट भी इसी आधुनिकता का हिस्सा है जो जंगल की आग की तरह सभी जगह व्याप्त है। डिजिटल मार्केटिंग इंटरनेट के माध्यम से कार्य करने में सक्षम है।

आज का समाज समय अल्पता से जूझ रहा है, इसलिये डिजिटल मार्केटिंग आवश्यक हो गया है। हर व्यक्ति इंटरनेट से जुड़ा है वे इसका  उपयोग हर स्थान पर आसानी से कर सकता  है । अगर आप किसी से मिलने को कहो तो वे कहेगा मेरे पास समय नही है, परंतु सोशल साइट पर उसे आपसे बात करने में कोई समस्या नही होगी । इन्ही सब बातों को देखते हुए डिजिटल मार्केटिंग इस दौर में अपनी जगह बना रहा है ।

जनता अपनी सुविधा के अनुसार इंटरनेट के जरिये अपना मनपसंद व आवश्यक सामान आसानी से प्राप्त कर सकती है । अब बाज़ार जाने से लोग बचते हैं ऐसे में डिजिटल मार्केटिंग बिज़नेस को अपने products और services लोगो तक पहुंचाने में मदद करती है। डिजिटल मार्केटिंग कम समय में एक ही वस्तु के कयी प्रकार दिखा सकता है और उप्भोक्ता को जो उपभोग पसंद है वे तुरंत उसे ले सकता है।  इस माध्यम से उपभोकता का बाज़ार जाना वस्तु पसंद करने, आने जाने में जो समय लगता है वो बच जाता है ।

ये वर्तमान काल में आवश्यक हो गया है । व्यापारी को भी व्यापार  में मदद मिल रही है। वो भी कम समय में अधिक लोगो से जुड़ सकता है और अपने उत्पाद की खूबियाँ उपभोक्ता तक पहुँचा सकता  है।

वर्तमान समय में डिजिटल मार्केटिंग की मांग :

परिवर्तन जीवन का नियम है , यह तो आप सब जानते ही हैं। पहले समय में और आज के जीवन में कितना बदलाव हुआ है और आज इंटरनेट का जमाना है । हर वर्ण के लोग आज इंटरनेट से जुड़े है,  इन्ही सब के कारण सभी लोगो को एक स्थान पर एकत्र कर पाना आसान है जो पहले समय में सम्भव नही था । इंटरनेट के जरिये हम सभी व्यवसायी और ग्राहक का तारतम्य स्थापित भी कर सकते हैं।

डिजिटल मार्केटिंग की मांग वर्तमान समय में बहुत प्रबल रुप में देखने को मिल रही है। व्यापारी जो अपना सामान बना रहा है , वो आसानी से ग्राहक तक पहुंचा रहा है।  इससे डिजिटल व्यापार को बढ़ावा मिल रहा है ।

पहले विज्ञापनो का सहारा लेना पड़ रहा था। ग्राहक उसे देखता था, फिर पसंद करता था , फिर वह उसे खरीदता था। परंतु अब सीधा उपभोक्ता तक सामान भेजा जा सकता है । हर व्यक्ति गूगल, फेसबुक , यूट्यूब आदि उपयोग कर रहा है, जिसके द्वारा व्यापारी अपना उत्पाद-ग्राहक को दिखाता है । यह व्यापार सबकी पहुंच में है- व्यापारी व उपभोक्ता की भी। हर व्यक्ति को आराम से बिना किसी परिश्रम के प्रतयेक  उपयोग की चीज़ मिल जाती है। व्यापारी को भी यह सोचना नही पड़ता कि वह अखबार, पोस्टर, या विज्ञापन का सहारा ले। सबकी सुविधा के मद्देनजर इसकी मांग है। लोगों का विश्वास भी डिजिटल मार्किट की ओर बड़   रहा है। यह एक व्यापारी के लिये हर्ष का विषय है। कहावत है “ जो दिखता है वही बिकता है” – डिजिटल मार्किट इसका अच्छा उदाहरण है ।

डिजिटल मार्केटिंग के प्रकार :

सबसे पहले तो आपको यह बता दे कि डिजिटल मार्केटिंग करने के लिये ‘इंटरनेट’ ही एक मात्र साधन है। इंटरनेट  पर ही हम अलग-अलग वेबसाइट के द्वारा डिजिटल मार्केटिंग कर सकते हैं । इसके कुछ प्रकार के बारे में हम आपको बताने जा रहे हैं –

(i) सर्च इंजन औप्टीमाइज़ेषन या SEO

यह एक ऐसा तकनीकी माध्यम है जो आपकी वेबसाइट को सर्च इंजन के परिणाम पर सबसे ऊपर जगह दिलाता है जिससे दर्शकों की संख्या में बड़ोतरी होती है। इसके लिए हमें अपनी वेबसाइट को कीवर्ड और SEO guidelines के अनुसार बनाना होता है।

(ii) सोशल मीडिया ( Social Media )

सोशल मीडिया कई वेबसाइट से मिलकर बना है – जैसे Facebook, Twitter, Instagram, LinkedIn, आदि । सोशल मीडिया के माध्यम से व्यक्ति अपने विचार हजारों लोगों के सामने रख सकता है । आप भली प्रकार सोशल मीडिया के बारे में जानते है । जब हम ये साइट देखते हैं तो इस पर कुछ-कुछ अन्तराल पर हमे विज्ञापन दिखते हैं यह विज्ञापन के लिये कारगार व असरदार जरिया है।

(iii) ईमेल मार्केटिंग ( Email Marketing )

किसी भी कंपनी द्वारा अपने उत्पादों को ई-मेल के द्वारा पहुंचाना ई-मेल मार्केटिंग है। ईमेल मार्केटिंग हर प्रकार से हर कंपनी के लिये आवश्यक है क्योकी कोई भी कंपनी नये प्रस्ताव और छूट ग्राहको के लिये समयानुसार देती हैं जिसके लिए ईमेल मार्केटिंग एक सुगम रास्ता है।

(iv) यूट्यूब चेनल ( YouTube Channel )

सोशल मीडिया का ऐसा माध्यम है जिसमे उत्पादक अपने उत्पादों को लोगों के समक्ष प्रत्यक्ष रुप से पहुंचाना है। लोग इस पर अपनी प्रतिक्रया भी व्यक्त कर सकते हैं। ये वो माध्यम है जहां बहुत से लोगो की भीड़ रह्ती है या यूं कह लिजिये की बड़ी सन्ख्या में users/viewers यूट्यूब पर रह्ते हैं।  ये अपने उत्पाद को लोगों के समक्ष वीडियो बना कर दिखाने का सुलभ व लोकप्रिय माध्यम है।

(v) अफिलिएट मार्केटिंग ( Affiliate Marketing )

वेबसाइट, ब्लोग या लिंक के माध्यम से उत्पादनों के विज्ञापन करने से जो मेहनताना मिलता है, इसे ही अफिलिएट मार्केटिंग कहा जाता है। इसके अन्तर्गत आप अपना लिंक बनाते हैं और अपना उत्पाद उस लिंक पर डालते है । जब ग्राहक उस लिंक को दबाकर आपका उत्पाद खरीदता है तो आपको उस पर मेहन्ताना मिलता है।

(vi) पे पर क्लिक ऐडवर्टाइज़िंग या PPC Marketing

जिस विज्ञापन को देखने के लिए आपको भुगतान करना पड़ता है उसे ही पे पर क्लिक ऐडवर्टीजमेंट कहा जाता है। जैसा की इसके नाम से विदित हो रहा है की इस पर क्लिक करते ही पैसे कटते हैं । यह हर प्रकार के विज्ञापन के लिये है ।यह विज्ञापन बीच में आते रह्ते हैं। अगर इन विज्ञापनो को कोई देखता है तो पैसे कटते हैं । यह भी डिजिटल मार्केटिंग का एक प्रकार है।

(vii) एप्स मार्केटिंग ( Apps Marketing )

इंटरनेट पर अलग-अलग ऐप्स बनाकर लोगों तक पहुंचाने और उस पर अपने उत्पाद का प्रचार करने को ऐप्स मार्केटिंग कहते हैं । यह डिजिटल मार्केटिंग का बहुत ही उत्तम रस्ता है। आजकल बड़ी संख्या में लोग स्मार्ट फ़ोन का उपयोग कर रहे हैं । बड़ी-बड़ी कंपनी अपने एप्स बनाती हैं और एप्स को लोगों तक पहुंचाती है।

डिजिटल मार्केटिंग की उपयोगिताएं :

डिजिटल मार्केटिंग की उपयोगिता के बारे में हम आप को बता रहे हैं –

(i) आप अपनी वेबसाइट पर ब्रोशर बनाकर उस पर अपने उत्पाद का विज्ञापन लोगों के लेटेर-बॉक्स पर भेज सकते हैं। कितने लोग आपको देख रहे हैं यह भी पता लगाया जा सकता है।

(ii) वेबसाइट ट्रेफ़िक- सबसे ज्यादा दर्शकों की भीड़ किस वेबसाइट पर है – पहले ये आप जान ले , फिर उस वेबसाइट पर अपना विज्ञापन डाल दें ताकी आपको अधिक लोग देख सकें ।

(iii) एटृब्युषन मॉडलिंग – इसके द्वारा ह्म यह पता कर सकते है की आजकल लोग किस उत्पाद में रुचि ले रहे हैं या किन-किन विज्ञापनों को देख रहे हैं । इसके लिये विशेश टूल का प्रयोग करना होता है जो की एक विशेश तकनीक के द्वारा किया जा सकता है और ह्म अपने उपभोक्ताओं की हरकतें यानी उनकी रुचि पर नज़र रख सकते हैं।

आप अपने उपभोक्ता से किस प्रकार सम्पर्क बना रहे हैं यह विषय महत्वपूर्ण है। आप उनकी आवश्यक्ता के साथ पसंद पर भी दृष्टी बनाकर रखा करें ऐसा करने से व्यापार में वृद्घि हो सकती है। आप पर उनका विश्वास भी अत्यन्त आवश्यक है, की वह विज्ञापन देख कर आपका उत्पाद खरीदने में संकोच न करें तुरंत ले लें। इनके विश्वास को आपने विश्वास देना है। ग्राहक को आश्वासन दिलाना आपका दायित्व है। अगर किसी को सामान पसंद न आये तो उसको बदलने के लिये वो अपना संदेश आप तक पहुंचा सके इसके लिये ईबुक आपकी सहायता कर सकता है।

निष्कर्ष :

डिजिटल मार्केटिंग एक एसा माध्यम बन गया है जिससे कि मार्केटिंग (व्यापार) को  बढ़ाया जा सकता है। इसके उपयोग से सभी लाभान्वित हैं । उपभोक्ता व व्यापारी के बीच अच्छे से अच्छा ताल-मेल बना रहे हैं , इसी सामजस्य को डिजिटल मार्केटिंग द्वारा पूरा किया जा सकता है । डिजिटल मार्केटिंग आधुनिकता का एक अनूठा उद्धरण है।

How to become a Journalist ?

पत्रकारिता : पत्रकारिता में  कैसे बनाये अपना करियर ?

आज कल हर कोई एक ऐसा करियर बनाना चाहता है जिसमे वो कुछ रचनात्मक कर सके। एक ऐसा करियर जो उसके गुणों और काबिलियत और भी निखार दे। एक ऐसा करियर जो उसके पसंदीदा विषय से जुड़ा हो। हर किसी के लिए उसका पसंदीदा विषय अलग अलग हो सकता है। पत्रकारिता यानी जर्नलिज्म समय के साथ बहुत बदल चूका है। अगर आप ने 12वीं में आर्ट्स स्ट्रीम लिया है और आप मीडिया में करियर बनाना चाहते है तो इस लेख को पढ़ें। इस लेख में हम आपको बताएंगे कि कैसे आप पत्रकारिता में भविष्य बना सकते हैं। हर किसी के मन में आता है कि एक कोर्स करने के बाद उसके लिए रोजगार के क्या अवसर होंगे। अगर आप भी जानना चाहते हैं कि पत्रकारिता के क्षेत्र में रोजगार के अवसर क्या हैं तो बिना समय व्यर्थ किये इस एक ही आर्टिकल में पत्रकारिता में भविष्य की पूरी जानकारी लें।

पत्रकारिता यानी कि जर्नलिज्म जो पहले के अनुसार बहुत बदल गया है। नई-नई तकनीकों और तकनीकी क्रांति के कारण भी इसमें बहुत बदलाव आये हैं। पहले जहाँ पत्रकारिता सिर्फ अखबार ,रेडियो, पत्रिकाएं और टीवी तक ही सिमित थी अब ऑनलाइन पत्रकारिता भी इस कतार में शामिल हो गई है। 12 वीं के बाद आप भी पत्रकारिता में भविष्य बना सकते हैं। इसके लिए आप 12 वीं के बाद पत्रकारिता में डिप्लोमा कोर्स या पत्रकारिता में सर्टिफिकेट कोर्स भी कर सकतें हैं। इसके अतिरिक्त भारत में बड़े -बड़े कॉलेज और यूनिवर्सिटी में जर्नलिज्म में डिग्री कोर्स भी करवाया जाता है। सिर्फ यहीं तक ही नहीं अगर आप आगे भी जर्नलिज्म की ही पढ़ाई करना चाहते हैं तो स्नातक के बाद जर्नलिज्म में पीजी और पीएचडी भी कर सकते है।

पत्रकारिता क्या है ?

पत्रकारिता आधुनिक समय में एक महत्वपूर्ण व्यवसाय बन गया है। जिसमे समाचार का एकत्रीकरण, समाचार लिखना, सारी जानकारियों को जुटाना, सम्पादित करना और सम्यक प्रस्तुतिकरण जैसे काम करने होते हैं। आज के समय में पत्रकारिता के अनेक माध्यम हो गए हैं जैसे कि अखबार, पत्रिकाएं , दूरदर्शन, रेडियो , वेब-पत्रकारिता आदि। जैस-जैसे इंटरनेट चर्चित हुआ है वैसे -वैसे पत्रकारिता ने भी अपने आप को विस्तृत किया है। अब हर कोई दुनिया में घट रही घटनाओं को और समाचारों को सबसे पहले जाना चाहता है। सब चाहते है कि वे बिना समय व्यर्थ किए मोबाइल में ही सारी जानकरी प्राप्त कर लें । जिस कारण पत्रकारिता ने अपने कार्य क्षेत्र को भी बहुत बढ़ाया है। अगर आपकी भी रूचि  समाचार ,दुनिया में घट रही घटनाओं में और लिखने में है, तो आप भी पत्रकारिता में अपना करियर बना सकते हैं। इस लेख के माध्यम से हम आपको बताएंगे कि पत्रकार बनने के लिए क्या करें , कहाँ से पत्रकारित कोर्स कर सकते हैं , 12वी के बाद कैसे पत्रकारिता में करियर बना सकते हैं ?

पत्रकार कैसे बने ?

अगर आपकी भी रूचि  समाचार में , दुनिया में घट रही घटनाओं में और लिखने में है, तो आपके लिए पत्रकार बनना कोई बड़ी बात नहीं है। पत्रकार बनने के लिए सबसे महत्वपूर्ण चीज़ सच्चाई और ईमानदारी है। अगर आप सच्चाई के साथ खड़े हैं और ईमानदारी से अपना कार्य करते है तो आपको पत्रकार बनने से कोई नहीं रोक सकता है। अगर देखा जाए तो पत्रकारिता का इतिहास हमारी आज़ादी से भी पहले का है। उस समय पत्रकारिता के लिए कोई कोर्स या विशेष संस्थान नहीं थे। पर आज के तकनिकी युग में और बढ़ते प्रतियोगिता के कारण इन संस्थाओं का एक व्यक्ति को प्रकार बनाने में बहुत बड़ा योगदान है। भारत में ऐसे बहुत सारे सरकारी संस्थान और यूनिवर्सिटी हैं जो पत्रकारिता में डिप्लोमा कोर्स पत्रकारिता में सर्टिफिकेट कोर्सपत्रकारिता में ग्रेजुएशन और पोस्ट ग्रेजुएशन लेवल के कोर्स करवाते हैं।

पत्रकारिता में करियर

अगर आप भी पत्रकारिता में करियर बनाना चाहते हैं तो ये बात जान लें कि पत्रकारिता एक बहुत विस्तृत क्षेत्र है। पत्रकारिता एक ऐसा विषय है जहाँ आप अपने पसंदीदा विषय के अनुसार आप अपना करियर बना सकते हैं। एक मीडिया हाउस में पत्रकारिता से सम्बंधित लगभग 27 अलग-अलग विभाग होते हैं। इसमें आप अपने पसंदीदा विषय के अनुसार एक विषय को अपने करियर के रूप में चुन सकते हैं। अगर आपकी रूचि लॉ में है तो आप विधि पत्रकारिता कर सकतें हैं, अगर आपकी रूचि इकोनॉमिक्स है तो आप आर्थिक पत्रकारिता कर सकते हैं, अगर आप की रूचि पॉलिटिक्स में है तो आप राजनैतिक पत्रकारिता कर सकते हैं।

ऐसे ही आप 27 विभागों में से किसी भी विभाग में अपनी रूचि के अनुसार करियर बना सकते है। पत्रकार को एक बुद्धिजीवी इंसान माना जाता है, एक ऐसा इंसान जो आमलोगों से कुछ हट कर सोचते और लिखते है। अगर आप भी किसी विषय को लेकर ऐसे ही अलग नजरिया रखतें है और उसे लिखने में रूचि रखतें हैं तो आप भी पत्रकार बन सकते हैं। क्योंकि पत्रकार हमेशा सिक्के के दोनों पहलुओं को देखने में दिलचस्पी रखते है। अगर आप सोच रहें है कि पत्रकारिता पाठ्यक्रम  करने के बाद पत्रकारिता के क्षेत्र में नौकरी के क्या-क्या अवसर है। पत्रकारिता प्रशिक्षण के बाद आप किसी न्यूज़ एजेंसी में काम कर सकते हैं, न्यूज़ वेबसाइट  में,  प्रोडक्शन हाउस में , प्राइवेट या सरकारी न्यूज़ चैनल में , प्रसार भर्ती में , रेडियो चैनल में, फिल्म मेकिंग में, किसी कंपनी में पीआर की तरह काम कर सकते हैं।

अगर आप पत्रकारिता का कोर्स चाहते है तो बताएं दें कि पत्रकारिता पाठ्यक्रम करने के बाद आप गवर्नमेंट सेक्टर और प्राइवेट सेक्टर दोनों  में काम कर सकते है। प्राइवेट सेक्टर में आप न्यूज़ चैनल, प्रोडक्शन हाउस, प्राइवेट रेडियो चैनल, फिल्म मार्किंग जैसे काम कर सकते हैं। बहुत से ऐसे प्राइवेट न्यूज़ चैनल हैं जहाँ समय-समय नौकरी के लिए आवेदन निकलते रहतें है। इसके अलावा आप प्राइवेट पब्लिकेशन हाउस में भी काम कर सकते हैं। अगर बात करें गोवेर्मेंट सेक्टर में जॉब की तो आप लोक सभा और राज्य सभा जैसे न्यूज़ चैनल के लिए काम कर सकते हैं। दूरदर्शन और आकाशवाणी में भी आप काम कर सकते हैं। इसके अलावा आप रोज़गार समाचार में भी काम कर सकते हैं।

पत्रकारिता कार्यक्षेत्र और करियर ऑप्शन

अगर आप भी पत्रकारिता कोर्स करना चाहते हैं पर इस बात को लेकर दुविधा में है कि इसके आगे क्या करें। पत्रकारिता पाठ्यक्रम   करने के बाद इसका कार्य क्षेत्र और करियर ऑप्शन क्या होगा तो आप निचे दिए गए बिंदुओं को पढ़ें।

  • एडिटर
  • कार्टूनिस्ट
  • फोटो जर्नलिज्म
  • प्रूफ रीडर
  • फीचर लेखक
  • लीडर राइटर
  • विशेष रिपोर्टर
  • आलोचक
  • प्रस्तुतकर्ता
  • शोधकर्ता
  • रिपोर्टर
  • ब्रॉडकास्ट रिपोर्टर
  • स्तम्भकार (कॉलमनिस्ट )

पत्रकारिता के विभाग

अगर आप जर्नलिज्म कोर्स करना चाहते हैं तो ये जरुरी है कि आप पहले से ही निर्धारित कर लें कि आप किस फील्ड में जाना चाहते हैं। पत्रकारिता के लिए अलग-अलग फील्ड है जैसे कि -प्रिंट जर्नलिज्म , इलेक्ट्रॉनिक जर्नलिज्म, वेब पत्रकारिता, पब्लिक रिलेशन आदि।पत्रकारिता में विषय के अनुसार अलग-अलग विभाग होते हैं। आप अपने पसंदीदा विषय के अनुसार अपने विभाग का चुनाव कर सकते हैं। हर क्षेत्र के लिए अलग विभाग होता है। नीचे कुछ विभाग के नाम दिए जा रहे हैं।

  1. खोजी पत्रकारिता (इनवेस्टिगेटिव जर्नलिज्म)
  2. पीत पत्रकारिता (येलो जर्नलिज्म)
  3. बाल पत्रकारिता
  4. खेल पत्रकारिता
  5. आर्थिक पत्रकारिता (इकनोमिक जर्नलिज्म)
  6. ग्रामीण पत्रकारिता
  7. व्याख्यात्मक पत्रकारिता
  8. विकास पत्रकारिता
  9. सन्दर्भ पत्रकारिता
  10. संसदीय पत्रकारिता
  11. रेडियो पत्रकारिता
  12. टीवी पत्रकारिता
  13. दूरदर्शन पत्रकारिता
  14. फोटो पत्रकारिता
  15. विधि पत्रकारिता
  16. अंतरिक्ष पत्रकारिता
  17. रक्षा पत्रकारिता
  18. सर्वोदय पत्रकारिता
  19. फिल्म पत्रकारिता
  20. महिला पत्रकारिता

पत्रकारिता के प्रमुख कोर्सेस

पत्रकार बनने के लिए आप कभी भी पढ़ाई शुरू कर सकते हैं। आप 12 वीं के बाद भी सीधे जर्नलिज्म के डिग्री कोर्स में प्रवेश ले सकते हैं। इसके लिए बहुत से संस्थान और यूनिवर्सिटी में प्रवेश परीक्षा भी आयोजित करते हैं। कुछ संस्थान या कॉलेज 12 वीं बोर्ड में प्राप्त अंक के अनुसार भी एडमिशन देते हैं। पत्रकारिता में प्रमुख कोर्सेस नीचे तालिका में दी जा रही है।

क्रमांककोर्स का नामअवधि
1बीए इन जर्नलिज्म3 वर्ष
2बीए इन जर्नलिज्म एंड मास कम्युनिकेशन3 वर्ष
3बैचलर इन जर्नलिज्म3 वर्ष
4बैचलर इन जर्नलिज्म एंड मास कम्युनिकेशन3 वर्ष
5बी.एससी इन जर्नलिज्म एंड मास कम्युनिकेशन3 वर्ष
6बीए इन मीडिया एंड कम्युनिकेशन3 वर्ष
7बीए इन मीडिया एंड कम्युनिकेशन मैनेजमेंट3 वर्ष
8बीए इन मीडिया एंड कम्युनिकेशन डिज़ाइन3 वर्ष
9बीए इन मीडिया स्टडीज3 वर्ष
10बैचलर ऑफ़ मास मीडिया3 वर्ष
11बीबीए इन मास कम्युनिकेशन एंड जर्नलिज्म3 वर्ष
12एम.ए  इन जर्नलिज्म2 वर्ष
13एम.ए  इन जर्नलिस्म एंड मास कम्युनिकेशन2 वर्ष
14एमजेएमसी2 वर्ष
15डिप्लोमा इन जर्नलिज्म1 वर्ष
16पीजी  डिप्लोमा इन एडवर्टिसमेंट एंड पब्लिक रिलेशन1 वर्ष

पत्रकारिता के लिए योग्यता

अगर आप पत्रकारिता कोर्स करना चाहते हैं तो जरुरी है कि आप ने 12वीं कक्षा उत्तीर्ण किया हो। पत्रकारिता करने के लिए आपको मानसिक रूप से मजबूत होना होगा। क्योंकि आप को काम डेस्क पर भी करना होगा और बाहर फील्ड में भी। जर्नलिस्ट होने के लिए बेहतर कम्युनिकेशन स्किल की भी आवश्यकता है। जर्नलिस्ट होने के लिए लिखने, एडिटंग करने और खोज करने की अच्छी क्षमता होनी चाहिए। अगर आप डेस्क में काम करेंगे तो जरुरी है कि आपको कंप्यूटर ज्ञान भी होना चाहिए। इसके अलावा जरुरी है की आप समय का सही से प्रबंधन करते हो। चीज़ों का गहराई में पड़ताल करने की योग्यता भी चाहिए। इसके अलावा पत्रकार होने के लिए सत्यनिष्ठ और ईमनादार होना भी जरुरी है।

पत्रकारिता में वेतन

अगर आप भी पत्रकारिता कोर्स करने की सोच रहें हैं और कोर्स के बाद नौकरी में मिलने वाले वेतन को लेकर भर्मित है तो यहां हम उस दुविधा का हल लाएं हैं। एक जर्नलिस्ट की पूरे वर्ष की सैलरी 20,0000 से 50,0000 के बीच हो सकता है। अगर भारत में जर्नलिस्ट की सैलरी की बात करें तो यहां शुरुआती सैलरी 10,000 से 20,000 होती है। पर धीरे-धीरे जैसे अनुभव होता रहता है सैलरी भी बढ़ती रहती है। एक सीनियर रिपोर्टर की सैलरी जिसे 10 से 12 वर्ष का अनुभव हो उसकी सैलरी 1-2 लाख रु.और चीफ एडिटर की 5 लाख या उससे भी अधिक हो सकती है।अंत में यही कहना सही होगा की कार्य अनुभव किसी भी कार्य क्षेत्र में बहुत महत्वपूर्ण होता हैं। जैसे -जैसे अनुभव बढ़ता जायेगा सैलरी भी बढ़ती रहेगी।

Travel and Tourism में करियर की बहार

घूमना- फिरना तो तकरीबन हर इंसान को अच्छा लगता है, लेकिन दुनियाभर में कुछ लोग ऐसे भी होते हैं जो इसके दीवाने होते हैं। जी हां, यानी उन लोगों में दुनिया भर में घूमना, हर जगह की रीति- रिवाजों को जानना, वहां के इतिहास से परिचित होना जैसे शौक होते हैं। ऐसे में अगर आप को भी ये शौक है, तो आप अपने इस शौक को अपने करियर में तब्दील कर सकते हैं। ट्रैवल एंड टूरिज्म आपके करियर का एक बेहतर विकल्प साबित हो सकता है। वैसे भी ट्रैवल एंड टूरिज्म इंडस्ट्री का दायरा हाल के सालों में तेजी से बढ़ा है। देखते ही देखते ट्रैवल एंड टूरिज्म इंडस्ट्री दुनियाभर का दूसरा सबसे बड़ा रोजगार देने वाला क्षेत्र बन गया है।

भारत में ट्रैवल एंड टूरिज्म

ट्रैवल प्रोफेशनल्स की मांग दुनियाभर में तेजी से बढ़ रही है। भारत भी इससे अछूता नहीं है। भारत में भी पिछले कुछ सालों से पर्यटन क्षेत्र में तेजी देखने को मिल रही है। इनक्रेडिबल इंडिया कैंपेन के जरिए भारत को सैलानियों को आकर्षित करने में मदद मिल रही है। यही नहीं, पहले की तुलना में अब तो इंडियन भी खूब विदेशों के सैर-सपाटा कर रहे हैं। जिससे यहां रोजगार के नए – नए अवसर भी पैदा हो रहे हैं। शायद यही वजह है कि भारत के युवा भी अब ट्रैवल एंड टूरिज्म में अपना करियर बनाने की चाह रखते हैं। भला चाहे भी क्यों ना आखिरकार ट्रैवल एंड टूरिज्म इंडस्ट्री पैसों के मामले में भी किसी से पीछे नहीं है। ट्रैवल एंड टूरिज्म इंडस्ट्री को पैसे वाली इंडस्ट्री कहा जाता है, क्योंकि इसमें जॉब करने वालो का सैलरी पैकेज भी काफी अच्छा होता है। तो चलिए जानते हैं ट्रैवल एंड टूरिज्म में करियर से जुड़ी सारी महत्वपूर्ण जानकारियां।

क्या है टूरिज्म में करियर का मतलब

टूरिज्म यानी कि घूमना-फिरना। चाहे वो मनोरंजन के लिए हो या फिर बिजनेस के लिए। अगर करियर में टूरिज्म की बात की जाए तो टूरिज्म एक ऐसा उद्योग है, जो एक बेहतर करियर के बहुत सारे अवसर प्रदान करती है। टूरिज्म यानी पर्यटन उद्योग को विशेष रुप से पांच करियर क्षेत्रों में विभाजित किया जा सकता है- आवास, भोजन और पेय सेवाएं, आराम और मनोरंजन, परिवहन और यात्रा सेवाएं। टूरिज्म से जुड़ना दिलचस्प और चुनौतिपूर्ण दोनों है।

टूरिज्म के लिए कोर्सेज

बदलते दौर के साथ अब पढ़ाई, करियर, नौकरी जैसे क्षेत्रों में भी काफी बदलाव आ चुका है। अब आपको सिर्फ लिमेटेड डिग्री से बंध कर रहने की जरुरत नहीं होती। आप अपने शौक के अनुसार भी अपना करियर ऑप्शन चुन सकते हैं, उससे संबंधित पढ़ाई कर सकते हैं और उसी क्षेत्र में नौकरी भी पा सकते हैं। ऐसे ही ट्रैवल एंड टूरिज्म इंडस्ट्री में भी है। इस इंडस्ट्री में भी करियर बनाने के लिए आपको डिप्लोमा और डिग्री जैसे कोर्सेज के कई विकल्प मिल जाएंगे।

डिप्लोमा कोर्सेज

डिप्लोमा इन ट्रैवल एंड टूरिज्म इंडस्ट्री मैनेजमेंट

डिप्लोमा इन टूरिज्म मैनेजमेंट

डिप्लोमा इन टूरिज्म एंड डेस्टिनेशन

सर्टिफिकेट कोर्स

फाउंडेशन एंड कंसल्टेंट कोर्स इन टूरिज्म लैंग्वेज

बेसिक कोर्स इन टूर ऑपरेशन मैनेजमेंट

बेसिक कोर्स इन एयर एंड सी कार्गो सर्विस मैनेजमेंट

बेसिक कोर्स इन ट्रैवल फेयर एंड टिकटिंग

बेसिक कोर्स इन कंप्यूटराइज्ड रिजर्वेशन सिस्टम

बेसिक कोर्स इन डॉमेस्टिक इंटरनैशनल टिकटिंग एंड एयरलाइंस विद कंप्यूटर

सर्टिफिकेट कोर्स ऑन एयरलाइंस टिकटिंग एंड टूर प्लानिंग

डिग्री कोर्स (ग्रेजुएट)

ग्रेजुएट इंटिग्रेटेड कोर्स इन टूरिज्म

बैचलर इन टूरिज्म एडमिनिस्ट्रेशन

बैचलर ऑफ होटल एंड टूरिज्म मैनेजमेंट

बैचलर ऑफ टूरिज्म एंड हॉस्पिटैलिटी मैनेजमेंट

पीजी कोर्स (मास्टर डिग्री)

मास्‍टर इन टूरिज्‍म

पीजी डिप्‍लोमा इन ट्रैवल मैनेजमेंट

पीजी सटिर्फिकेट कोर्स इन ट्रैवल एंड टूरिज्म मैनेजमेंट

योग्यताएं

ट्रैवल एंड टूरिज्म इंडस्ट्री के डिप्लोमा,डिग्री समेत कई कोर्सेज में आप १२वीं के बाद प्रवेश ले सकते हैं। वहीं मास्टर्स के लिए आपका ग्रेजुएट होना जरूरी होता है। इस कोर्स के लिए किसी भी स्ट्रीम के छात्र अपना आवेदन कर सकते हैं। देश के कई मैनेजमेंट स्कूलों के टूरिज्म कोर्सेज में एडमिशन लेने के लिए युवाओं को कैट-मैट की परीक्षा भी देनी पड़ती है।

स्किल्स

ट्रैवल एंड टूरिज्म इंडस्ट्री में करियर बनाने के लिए आपने में कुछ स्किल्स का होना भी बहुत जरूरी है। साथ ही कुछ स्किल ऐसे भी हैं, जिसके होने से आपको वरीयता दी जाती है।

  • बेहतर कम्युनिकेशन स्किल
  • कस्टम सर्विस स्किल्स
  • प्रॉब्लम सॉल्विंग स्किल्स
  • डिसिजन मेकिंग स्किल्स
  • फॉरेन लैंग्वेज नॉलेज
  • ज्योग्राफी नॉलेज
  • एडवेंचरस नेचर
  • देश और दुनिया की संस्कृति और रीति-रिवाजों से जुड़ाव होना

टूरिज्म में रोजगार के विकल्प 

इस इंडस्ट्री में आप सरकारी, प्राइवेट और मल्टीनेशनल कंपनियों में रोजगार के अवसर तलाश कर सकते हैं। होटल्स, एयरलाइंस, रेलवे, ट्रैवल्स मैनेजमेंट कंपनियां जैसे कई क्षेत्र हैं जहां आप अपना बेहतर भविष्य बना सकते हैं। इन सब के अलावे आप अपना बिजनेस भी कर सकते हैं। आइए आपको बताते हैं कुछ प्रमुख फील्ड के नाम, जिसे आप अपने करियर के रुप में चुन सकते हैं।

  • टूर ऑपरेटर्स
  • ट्रैवल एजेंट
  • टूर प्लानर्स
  • टूर गाइडेंस
  • सेल्स एंड मार्केटिंग स्टॉफ
  • ट्रैवल मैनेजर
  • फूड एंड बेवरेज सर्विस
  • एग्जीक्यूटिव सेफ
  • पीआर मैनेजर
  • एयर होस्टेस

इन सब के अलावे टैवल एंड टूरिज्म इंडस्ट्री में और भी बहुत से ऐसे करियर ऑप्शन मौजूद हैं, जो आपको एक सुनहरा भविष्य दे सकते हैं।

प्रमुख संस्थान

  • इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ टूरिज्म ऐंड ट्रेवॅल मैनेजमेंट, नई दिल्ली
  • भारतीय विद्या भवन, नई दिल्ली
  • बुंदेलखंड यूनिवर्सिटी, झांसी
  • आंध्र यूनिवर्सिटी, विशाखापट्टनम
  • लखनऊ यूनिवर्सिटी, यूपी
  • इंदिरा गांधी ओपन यूनिवर्सिटी, दिल्ली
  • देवी अहिल्या विश्वविद्यालय, इंदौर
  • जीवाजी यूनिवर्सिटी, ग्वालियर
  • मदुरै कामराज यूनिवर्सिटी, तमिलनाडु
  • तेजपुर यूनिवर्सिटी, असम
  • हिमाचल प्रदेश यूनिवर्सिटी, हिमाचल प्रदेश

Automobile Engineering में करियर

ऑटोमोबाइल इंजीनियरिंग क्या है ?

कई छात्र अपने करियर को लेकर काफी चिंतित रहते है. और ये चिंता तब ज्यादा बढ़ती है. जब आप 12th की परीक्षाएं दे चुके होते है. बोर्ड की परीक्षाएं देने के बाद विद्यार्थियों के दिमाग में एक प्रश्न होता है. कि हम कौन सा कोर्स या कौन से फील्ड में जाये. कौन सा फील्ड हमारे लिए बेहतर होगा. कई विद्यार्थी मेडिकल में, तो कई पुलिस में या तो इंजीनियरिंग में अपना करियर बनाने की सोचते है. परन्तु विद्यार्थियों को फील्ड की सही और पूरी जानकारी ना होने पर, वे कुछ ऐसे फील्ड को चुन लेते है. जिस फील्ड में उनकी बिलकुल भी रुचि न हों. तथा वह इस फील्ड में अपना करियर नही बना पाते. इसलिए आप वही फील्ड चुने, जिसमे आपको रुचि अथार्थ इंटरेस्ट हो.

यदि आप ऑटोमोबाइल इंजीनियरिंग में अपना कैरियर बनना चाहते है. तो आपको इस फील्ड से सम्बंधित जानकारी होनी आवश्यक है. इसलिए यहाँ पर आपको ऑटोमोबाइल फील्ड से जुडी वे सभी सूचनाएं दी जा रही है. जिससे आप खुद ही वह फील्ड चुन सके. जो आपके लिए हो बेहतर.

ऑटोमोबाइल इंजीनियर्स कौन होते है ?

ऑटोमोबाइल इंजीनियर, कार, स्कूटर, बाइक, ऑटो, ट्रेक्टर, या किसी अन्य वाहन के नए डिजाइन को डेवलप करने का कार्य करते हैं। ऑटोमोबाइल इंजीनियर को आमतौर पर ऑटो डिजाइनर भी कहा जाता है. अथार्थ ऑटोमोबाइल इंजीनियर्स, किसी भी वाहन के संकल्पना स्टेज (Concept Stage) से लेकर प्रोडक्शन स्टेज तक शामिल होते हैं. ऑटोमोबाइल इंजीनियर्स तीन प्रकार के होते है – प्रोडक्ट या डिजाइन इंजीनियर्स, डेवलपमेंट इंजीनियर्स और मैन्युफैक्चरिंग इंजीनियर्स. ऑटोमोबाइल फील्ड में डिजाइन इंजीनियर्स, वे इंजीनियर होते है. जो ऑटोमोबाइल्स के कम्पोनेंट, सिस्टम्स की डिजाइनिंग व टेस्टिंग करते हैं। वे हर एक कम्पोनेंट को डिजाइन व टेस्ट करते हैं, जिससे वे जरुरत पड़ने पर बिना किसी रूकावट के काम आ सके।

डेवलपमेंट इंजीनियर्स वे इंजीनियर होते है. जो ऑटोमोबाइल्स के सभी पार्ट्स को जोड़ते है. तथा मैन्युफैक्चरिंग इंजीनियर्स, ऑटोमोबाइल के सभी भागो को जोड़ कर किसी भी वाहन को पूरा तैयार करते हैं।

ऑटोमोबाइल इंजीनियरिंग फील्ड के अंतर्गत आने वाले कुछ विषय जैसे विद्युत मोशन (Electrical Motion), इलेक्ट्रिक सिस्टम, कंट्रोल सिस्टम, तरल यांत्रिकी (Fluid Mechanics), आपूर्ति श्रृंखला प्रबंधन (Supply chain management,), कम्प्यूटर एडेड डिजाइन (computer Aided Design), ऊष्मा (Thermodynamics), वायुगतिकी (Ayrodaynamics), आदि विषय शामिल है.

ऑटोमोबाइल इंजीनियरिंग शैक्षिक योग्यताएं :

यदि आप एक कुशल ऑटोमोबाइल इंजीनियर बनना चाहते है. तो आपके लिए ऑटोमोबाइल इंजीनियरी में डिप्लोमा से लेकर पीएचडी तक के कोर्स उपलब्ध हैं। जो भी विद्यार्थी इस फील्ड में अपना करियर बनाना चाहते है. वे ऑटोमोबाइल इंजीनियरी में डिप्लोमा / बी ई या बी.टेक. कोर्स कर सकते है. यदि आप अभी मैकेनिकल इंजीनियरिंग से  बी ई या बी.टेक. कोर्स कर रहे है. तो भी आप ऑटोमोबाइल इंजीनियरिंग में अपना करियर बना सकते है. इसके लिए आप मैकेनिकल इंजीनियरिंग से  बी ई या बी.टेक. कोर्स करने के पश्चात ऑटोमोबाइल इंजीनियरी से एम.टेक कर सकते हैं।

ऑटोमोबाइल इंजीनियरिंग कोर्स

  1. BE Automobile Engineering
  2. B.Tech Automobile Engineering
  3. Certificate Program in Automobile Engineering
  4. Diploma in Automobile Engineering
  5. PG Diploma in Automobile Engineering

इंडिया के बेस्ट ऑटोमोबाइल इंजीनियरिंग संस्थान

  1.  IIT Delhi
  2. IIT Roorkee
  3. Sathyabama University Chennai
  4. Manipal Institute of Technology Manipal
  5. Hindustan Institute of Engineering Technology Chennai
  6. Madras Institute of Technology Chennai
  7. P.S.G. College of Technology Coimbato
  8. SCMS School of Engineering and Technology (SSET), Cochin
  9. Veermata Jijabai Technological Institute (VJTI), Mumbai
  10. SRM University, Chennai
ऑटोमोबाइल इंजीनियरिंग क्षेत्र में रोजगार के अवसर

यदि आप ऑटोमोबाइल इंजीनियरिंग से डिप्लोमा / बैचलर ऑफ इंजीनियरिंग (B.E) / या बीटेक कर रहे है. तो आप अपने करियर को लेकर बिलकुल भी चिंतित ना हो. ऑटोमोबाइल इंजीनियरिंग में आपके लिए रोजगार के बेहतरीन अवसर उपलब्ध है.  इस फील्ड में आप डिजाइनिंग, प्रोडक्शन, रिसर्च और विकास कार्यो में लगे विभागों  (Departments) में भी रोजगार पा सकते हैं। भारत में, ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री काफी तेजी से ‍उन्नति कर रही है। इसलिए इस क्षेत्र से जुड़े युवाओं के लिए करियर अवसर की संभावनाएं भी बढ़ गई हैं।

ऑटोमोबाइल इंजीनियरिंग फील्ड में वे कंपनियां आती है. जो बाइक, कार, स्कूटर, ट्रक, ट्रेक्टर, बस, ऑटो, आदि का निर्माण करती है. इस फील्ड के लिए कुछ मुख्य कंपनियों में  टाटा मोटर्स, अशोक लेलैंड, हिन्दुस्तान मोटर्स, मारुति, ऑडी, रेनौल्ट और बीएमडब्ल्यू, टोयटा, होंडा, स्कोडा, महिन्द्रा आदि कंपनियां शामिल है।

ऑटोमोबाइल इंजीनियर के लिए वेतन 

इस क्षेत्र के लिए मासिक वेतन विद्यार्थी की योग्यता, अनुभव तथा उस कंपनी की अवस्था पर निर्भर करता है जहाँ विद्यार्थी रोजगार कर रहा है. परन्तु शुरुआत (Starting) में किसी भी फ्रेशर ऑटोमोबाइल इंजीनियर को 15,000 – 20,000 रुपया मासिक वेतन मिल सकता है. जैसे जैसे विद्यार्थी का इस क्षेत्र मे अनुभव (experience) बढ़ता जाता है, वैसे-वैसे आपके मासिक वेतन (monthly salary) में भी बढ़ोतरी (Growth) होती रहती है.

डेटा साइंटिस्ट

डेटा साइंटिस्ट

अगर आप में विश्लेषण और कहानी कहने का स्किल है तो आपके लिए डेटा साइंटिस्ट की नौकरी पर्फेक्ट है. जिन लोगों ने मैथ्स, कंप्यूटर साइंस, मेकेनिकल इंजीनियरिंग में एमटेक या एमएस किया है वो डेटा साइंटिस्ट बन सकते हैं. इसके साथ ही कैंडिडेट्स को Python, Java, R, SAS प्रोग्रामिंग लैंग्वेज की भी नॉलेज होनी चाहिए. अधिकतर कंपनियां कॉम्पिटिशन में आगे बने रहने के लिए डेटा साइंटिस्ट की मदद लेती हैं. ये साइंटिस्ट रिजल्ट्स का बड़ी बारीकी से एनालिसिस करते हैं. डेटा स्टोर करने वाली कंपनीज, जैसे- गूगल, अमेजन, माइक्रोसॉफ्ट, ईबे, लिंक्डइन, फेसबुक और ट्विटर आदि को सबसे ज्यादा जरूरत डाटा साइंटिस्ट की ही है

क्या है डेटा साइंटिस्ट 
डेटा साइंटिस्ट का काम डेटा को कैप्चर करना है. जिसके लिए प्रोग्रामिंग स्किल्स और डेटाबेस स्किल्स की जरूरत होती है. डेटा साइंटिस्ट स्टेट और मैथ्स टूल के जरिए डेटा का विश्लेशण करता है. इसको वह पॉवर प्वाइंट , एक्सेल, गूगल विश्वुलाइजेशन के जरिए प्रस्तुत करता है. लेकिन डेटा को वह एक कहानी के जरिए जोड़ते हुए बयां करता है.

डेटा साइंटिस्ट बनने के लिए जरूरी क्वॉलीफिकेशन
डेटा साइंटिस्ट बनने के लिए कैंडिडेट्स के पास मैथ्स, कंप्यूटर साइंस, इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग, एप्लाइड साइंस, मेकेनिकल इंजीनियरिंग में एमटेक और एमएस की डिग्री होना जरूरी है. यही नहीं कैंडिडेट्स को सांख्यिकी मॉडलिंग, प्रोबेबलिटी की नॉलेज होना बेहज जरूरी है. इसके अलावा Python, Java, R, SAS प्रोग्रामिंग लैंग्वेज की समझ होना भी बेहद जरूरी है. सबसे ज्यादा जरूरी है कि कैंडिडेट्स में नए प्रोग्राम बनाने के लिए ग्लोबल बिजनेस के साथ काम करने की योग्यता होनी चाहिए.

डेटा वैज्ञानिक कौशल एवं योग्यता

टेक्निकल स्किल (एनालिटिक्स)

  • पढाई (Education) – डेटा वैज्ञानिक की पढाई बहुत उच्च होती है. डेटा वैज्ञानिक बनने के लिए मास्टर डिग्री में कम से कम 88% और पीएचडी में 46% जरुरी होते है. एक बहुत मजबूत शैक्षिक पृष्ठभूमि के साथ साथ डेटा वैज्ञानिक बनने के लिए गहरे ज्ञान की भी जरुरत होती है. इसके लिए गणित, सांख्यिकी, कंप्यूटर साइंस और इंजीनियरिंग की आवश्कता होती है.
  • SAS (सांख्यिकीय विश्लेषण प्रणाली) – ये एनालिटिकल टूल है, जिसका गहराई से ज्ञान बहुत जरुरी होता है.

टेक्निकल स्किल (कंप्यूटर साइंस) –

  • पाइथन कोडिंग (Python Coding) – पाइथन बहुत कॉमन कोडिंग लैंग्वेज है. डेटा साइंस में इसका ज्ञान बहुत जरुरी है, इसके साथ जावा, पर्ल, c/c++ भी जरुरी होती है.
  • हडूप प्लेटफार्म (Hadoop Platform) – ये हमेशा जरुरी नहीं होता है, लेकिन कुछ केस में इसकी जरूरत पड़ती है. क्लाउड टूल्स जैसे अमेज़न s3 अगर आपको आता है, तो भी आप इस प्लेटफार्म में काम कर सकते है.
  • SQL डेटाबेस/कोडिंग हडूप के होते हुए, SQL की डाटा साइंस में जरूरत नहीं पड़ती है, लेकिन कंपनी के द्वारा डाटा वैज्ञानिक से फिर भी उम्मीद लगाई जाती है कि वे SQL में लिख व् समझ सकें.
  • असंरचित डेटा (Unstructured data) – यह महत्वपूर्ण है कि एक डेटा वैज्ञानिक असंरचित डेटा के साथ काम करना जानता हो, चाहे वो इसके लिए सोशल मीडिया, विडियो या ऑडियो की मदद ले.

गैर तकनीकी कौशल

  • बौद्धिक जिज्ञासा (Intellectual curiosity) – डेटा वैज्ञानिक को हमेशा कुछ नया सीखने की चाह होनी चाहिए. कोई कम्पनी जो डेटा वैज्ञानिक को अपने यहाँ रखती है, वो उसे अपनी कम्पनी का प्रोब्लम सॉल्वर समझती है. उसे लगता है, उसके पास हर बात का हल होगा. इसके लिए जरुरी है कि डेटा वैज्ञानिक मानसिक तौर पर उस बात के लिए तैयार रहे.
  • व्यावसायिक कौशल – डेटा वैज्ञानिक को इंडस्ट्री का अच्छा ज्ञान होना चाहिए, उसे सभी तरह की व्यावसायिक परेशानीयों का अच्छे से पता होना चाहिए, ताकि वो उनको हल भी निकाल सके. डेटा वैज्ञानिक को यह ज्ञात होना चाहिए, कौनसी परेशानी का पहले हल निकालना ज्यादा जरुरी है.
  • कम्युनिकेशन स्किल  – कंपनी ऐसे डेटा वैज्ञानिक की तलाश करती है, जो अपनी टेक्निकल बातों को नॉन टेक्निकल डिपार्टमेंट जैसे मार्केटिंग एवं सेल्स डिपार्टमेंट को अच्छे से समझा सकें. डेटा वैज्ञानिक को अपने नॉन टेक्निकल साथियों की बातों और उनकी जरुरतों को समझते हुए, ऐसा काम करना चाहिए जो कंपनी के लिए फायदेमंद हो.

कंपनियों में डेटा वैज्ञानिकों की जरुरत

आजकल बड़ी बड़ी कंपनियां अपने व्यापार को बढ़ाने के लिए रिसर्च एवं एनालिसिस (R&A) डिपार्टमेंट को तेजी से बढ़ा रही है, जिसके बाद अच्छे, योग्य डेटा वैज्ञानिकों के लिए मांग बढ़ रही है. कहते है अगले तीन साल में भारत में 2 लाख एनालिटिकल प्रोफेशनल की जरुरत पड़ेगी. अभी अमेरिका में भी एनालिटिकल प्रोफेशनल की 100 में से 40 पोजीशन ही भरी हुई है. अमेरिका में डेटा वैज्ञानिक को अभी साल के 2 लाख डॉलर मिलते है.

अमेरिका के बाद भारत ही है जहाँ एनालिटिकल, डाटा साइंस प्रोफेशनल की सबसे ज्यादा डिमांड है. भारत में इनकी बढ़ती डिमांड के कारण अब नौजवान इसी दिशा में करियर बनाना चाहते है. लेकिन अभी भी उनके मन में बहुत सी बातें है, जो इस जॉब के बारे में क्लियर नहीं है. इस आर्टिकल को पढने के बाद आपको बहुत से सवालों के जबाब मिल जायेंगें.

  • जिस किसी उम्मीदवार के पास R कोडिंग का ज्ञान है, उसे सालाना20 लाख आय मिलेगी, जबकि को पाइथन कोडिंग में काम करता है उसे सालाना 9.36 लाख मिलेंगें. R एनालिटिक्स इंडस्ट्री में बहुत उपयोगी टूल है. इसमें कोई दोराहें नहीं है कि पाइथन बहुत तेजी से काम करती है. लेकिन इस इंडस्ट्री में माना जाता है कि अगर आपको एक टूल का अच्छे से ज्ञान हो गया है तो आपको आगे दुसरे टूल के बारे में भी ज्ञान हासिल करना चाहिए. इस समय बड़ी बड़ी कंपनियां प्रतिभा और कौशल दोनों को देखती है.
  • अगर कोई उम्मीदवार डाटा विज्ञान और बिग डेटा का ज्ञान रखता है तो वो डेटा वैज्ञानिक के मुकाबले 8% अधिक कमाई करता है. बिग डेटा और डाटा विज्ञान की जानकारी रखने वाले को 10 लाख सालाना मिलता है, जबकि सिर्फ बिग डेटा के जानकर को 9.80 लाख सालाना मिलता है.
  • भारत के मुंबई शहर में डेटा वैज्ञानिक को बाकि शहरों के मुकाबले अधिक आय दी जाती है. अगर को डेटा वैज्ञानिक का काम करना चाहता है, तो वो मुंबई शहर में प्रयास करे, वहां सालाना आय 19 लाख है, जो बाकि शहरों के मुकाबले अधिक है.

डेटा वैज्ञानिक की आय

एक स्टाफिंग सलूशन कम्पनी के अनुसार डेटा वैज्ञानिक जिसके पास 5 साल का अनुभव है, वो एक साल में लगभग 75 लाख रूपए कमा लेता है, जबकि 5 साल के अनुभव के साथ सीए (CA) 8-15 लाख सालाना और इंजिनियर 5-8 लाख ही कमा पाता है. डेटा वैज्ञानिक की मांग आज के समय में सबसे अधिक है. इस जॉब को आज हॉटेस्ट जॉब कहा जाता है. डेटा वैज्ञानिक आजकल सीए एवं इंजिनियर की तुलना में बहुत अधिक कमा रहे है. एक मैगजीन के अनुसार इसे 21वीं शताब्दी की सबसे अच्छी जॉब कहा गया है. इसके साथ ही इसे 2016 की बेस्ट जॉब बताया गया है. डेटा विज्ञान एक ऐसा काम है, जिसमें डेटा की प्रक्रिया एवं प्रणाली का अच्छे से ज्ञान होना चाहिए, साथ ही डेटा का अलग अलग तरीके से संरचित एवं असंचरित दोनों रूप में ज्ञान होना चाहिए. डाटा एनालिस्ट और डेटा वैज्ञानिक का काम बहुत मिलता जुलता है.

सीए, इंजिनियर की आजकल भेड़ चाल है. बहुत अधिक मात्रा में इनके होने से जॉब की कमी होती जा रही है. जॉब रहती भी है तो, विकल्प अधिक होने से इन्हें कम पैसे ऑफर होते है, जिससे अच्छी पढाई, और डिग्री के बावजूद इन्हें कम में ही गुजारा करना पड़ता है. डेटा वैज्ञानिक आज के समय करियर के लिए बहुत अच्छा विकल्प है. डेटा वैज्ञानिक बनने के लिए आजकल कई लोग कदम उठा रहे है, इस ओर ही वे अपना करियर बनाना चाहते है.

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